ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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Love Poems in Hindiहम जानते हैं, जिसका अतीत नहीं होता, उसका भविष्य भी नहीं होता। जो केवल वर्तमान में रहता है, वह किसी प्रकार का रचनात्मक कर्म नहीं संवार सकता। इसलिए सुमन की कविताएं अतीत विरह की नहीं, अतीत अहसास की कविताएं हैं। — मृदुला गर्ग (adsbygoogle =...
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मार्क्सवाद का अर्धसत्य के बहाने एकालाप— पंकज शर्माअनंत ने पूरी दुनियाभर के जनसंघर्षों को एक नया आयाम प्रदान करने वाले महानायक के निजी जीवन संदर्भों के हवाले से उन्हें खलनायक घोषित कर दिया और भारतीय सामाजिक परंपरा के परिप्रेक्ष्य में उनका मूल्यांकन करने के फिराक में...
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कहानी की समीक्षा कैसे करें | तंत्र और आलोचना — रोहिणी अग्रवाल‘तेरह नंबर वाली फायर ब्रिगेड‘रोहिणी अग्रवालमहर्षि दयानंद विश्वविद्यालय,रोहतक, हरियाणामेल: rohini1959@gmail.comमो० : 9416053847कौतूहल और पठनीयता - ये दो ऐसी विशिष्टताएं है जो कथा साहित्य की रीढ़ हैं, लेकिन...
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निरन्तर अन्तर्यात्रा की कविता— प्रभात त्रिपाठीसमीक्षा‘जहाँ होना लिखा है तुम्हारा’ अभी मैं इसी पर सोच रहा हूँ। मैं अपने सोचने को ही लिखना चाहता हूँ। रोचक बात यह है कि मैंने इस किताब का ब्लर्ब भी लिखा है, और शायद तब भी मैंने जरूर सोच समझ कर ही अपनी बातें लिखी होंगी।...
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सोशल नेटवर्किंग साइट पर- वहां इन दिनों कविता का स्वर्णकाल चल रहा है । किसिम किसिम की कविता लिखी और पोस्ट जा रही है और एक खास किस्म की कविता को लेकर बहुत हो हल्ला भी मच रहा है  (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); कोलाहल कलह में कविता— अनंत विजयहि...
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अनमैनेजेबिल का मैनेजमेण्ट : शुभम श्री की पुरस्कृत कविता— अर्चना वर्मा कविता के बने बनाये ढाँचे तो बीसवीं सदी में घुसने के साथ ही टूट फूट रहे हैँ लगातार। अब मान्यता यह है कि साहित्य सिर्फ़ इसलिये साहित्य होता है कि हमने उसे साहित्य होने की मान्यता दे रखी है। मान...
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Namvar hone ka arth : Alochana ka VatvrikshSwapnil Srivastavaनामवर होने का अर्थ: आलोचना का वटवृक्ष स्‍वप्निल श्रीवास्‍तव उनके जीवन में दु:ख और संघर्ष साथ-साथ चलते रहे, लेकिन वे दक्ष नट की तरह जीवन रज्‍जु पर चलते रहे। उन्‍होंने संघर्ष को जीवन ऊर्जा का केन्...
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Padtal Prem Kahaniyon ki —  Rohini Aggarwalचुप्पी में पगे शुभाशीष बनाम पचास साल का अंतराल और प्रेम को रौंदती आक्रामकता — रोहिणी अग्रवालअज्ञेय की कहानी 'पठार का धीरज' से कुछ दृश्य और संवाद . . .थोड़ी दूर पर एक स्त्री स्वर बोला, 'तुम लोग वास्तव से भागना...
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लौटना है फिलवक्त जहाँ हूँ— अनिरुद्ध उमट"कोई कवि यशः प्रार्थी कवि है या नहीं, इसे जाँचने की मेरे पास एक ही कसौटी है। यदि वह मुझ से कहता है कि मेरे पास कुछ महत्व की बातें है जिन्हें कहने के लिए मैं कविता करता हूँ, तो मुझे उसके कवित्व पर सन्देह हो जाता है। किन्तु यदि...
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Kautuhal se Aatmasakshatkar tak faila Kahani ka Vitaan— Rohini Agrawalहिंदी साहित्यिक कहानी के अवयवों को आधुनिक दृष्टि से दोबारा परिभाषित किये जाने की कितनी आवश्यकता थी यह वरिष्ठ आलोचक रोहिणी अग्रवाल के 'रचना समय' जनवरी 2016  में प्रकाशित इस लेख को पढ़ने स...