ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
23
प्रतियोगिता का दबाव और कहानीतो परियां कहां रहेंगी— आकांक्षा पारे काशिव (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); 100% पढ़ी जाने वाली और 101% तसल्ली बख्श कथा है आकांक्षा पारे काशिव की 'तो परियां कहां रहेंगी'। ज़िन्दगी की वह जंग जो एक सन्तान प्रतियोग...
Bharat Tiwari
23
दूर से नीले रंग की बस ऐसे चली आ रही थी जैसे अगर एक्सीलेटर से पैर हटा तो चालान कट जाएगा। सड़क पर खड़े लोग तितर-बितर हो गए। बस ने चीखते हुए ब्रेक लगाया और बस की हालत देख कर इंतजार में खड़े लोग सकते में आ गए। अंदर सवारियों और बकरियों में अंतर करना मुश्किल था। बाहर लोग...
Bharat Tiwari
23
इंडिया टुडे साहित्य वार्षिकी  में प्रकाशित आंकाक्षा पारे की कहानी नीम हकीमरक्कू भैया का कहा ब्रहृम वाक्य। ऐसे कैसे टाल दें। तीन दिन खद्दर कपड़े से नाक पोंछ-पोंछ कर भले ही बंदर के पिछवाड़े की तरह हो जाए लेकिन मजाल क्या कि तीन दिन से पहले कोई सीतोपलादि का क...
Bharat Tiwari
23
रवीन्द्र कालिया स्मृति व अन्य पुरस्कार अर्पण समारोह सम्पन्न Photo (c) Bharat Tiwariदिनांक 15 अप्रैल, 2017 की शाम को नई दिल्ली के गांधी शान्ति प्रतिष्ठान में युवा कवि प्रांजल धर के संयोजन में पुरस्कार अर्पण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर वर्ष 2016-17...
prabhat ranjan
34
समकालीन लेखिकाओं की सीरिज में आज आकांक्षा पारे की कहानी. उनकी कहानियां स्त्री लेखन के क्लीशे से पूरी तरह से मुक्त है. उनकी कहानियों में एक अन्तर्निहित व्यंग्यात्मकता है जो उनको अपनी पीढ़ी में सबसे अलग बनाती है. आप भी पढ़िए उनकी एक प्रतिनिधि कहानी- मॉडरेटर ======...
 पोस्ट लेवल : akanksha pare आकांक्षा पारे