ब्लॉगसेतु

भावना  तिवारी
17
कुड़िये कर कुड़माई,बहना चाहे हैं,प्यारी सी भौजाई।धो आ मुख को पहले,बीच तलैया में,फिर जो मन में कहले।।गोरी चल लुधियाना,मौज मनाएँगे,होटल में खा खाना।नखरे भारी मेरे,रे बिक जाएँगे,कपड़े लत्ते तेरे।।ले जाऊँ अमृतसर,सैर कराऊँगा,बग्गी में बैठा कर।तुम तो छेड़ो कुड़ियाँ,पंछी बिणजा...
 पोस्ट लेवल : माहिया Basudeo Agarwal
भावना  तिवारी
17
कौन समय को रख सकता है, अपनी मुट्ठी में कर बंद।समय-धार नित बहती रहती, कभी न ये पड़ती है मंद।।साथ समय के चलना सीखें, मिला सभी से अपना हाथ।ढल जातें जो समय देख के, देता समय उन्हीं का साथ।।काल-चक्र बलवान बड़ा है, उस पर टिकी हुई ये सृष्टि।नियत समय पर फसलें उगती, और बादलों...
 पोस्ट लेवल : आल्हा छंद Basudeo Agarwal