ब्लॉगसेतु

Ratan Singh Shekhawat
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आज जिस तरह से कार्य के आधार पर लोकतंत्र के चार स्तम्भ है ठीक उसी तरह से वैदिक काल में भी कार्यनुसार चार वर्ण बनाये गये- जिसमें शासन और सुरक्षा व्यवस्था देखने वालों को क्षत्रिय नाम दिया गया, शिक्षा व कानून आदि बनाने वालों को ब्राह्मण, व्यापार करने वालों को वैश्य और...
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sanjay krishna
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संजय कृष्ण : प्रो श्यौराज सिंह बेचैन दलित चिंतन का एक महत्वपूर्ण नाम है। दिल्ली विवि में प्रोफेसर हैं। 'मेरा बचपन मेरे कंधों परÓ आत्मकथा से चर्चित बेचैन रांची में दलित सम्मेलन में भाग लेने आए हुए थे। जागरण संवाददाता से कई मुद्दों पर उनसे बातचीत की। प्रमुख अंश।...
 पोस्ट लेवल : dalit
sanjay krishna
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संजय कृष्ण : काशी हिंदू विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चौथीराम यादव ने मंगलवार को जागरण से विशेष बातचीत में कहा कि दलित साहित्य में भी अंतर्विरोध उभर रहे हैं। यह ठीक भी है। जैसे डा. धर्मवीर खुद को अंबेडकर से आगे बताते हैं। वे अंबेडकर को...
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