ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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मरहूम सय्यद इक़बाल हुसैन ज़ैदी वल्द सय्यद ज़ुल्फ़िक़ार हुसैन ज़ैदीइन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलैही राजेऊन अफ़सोस अद अफ़सोस जौनपुर सिपाह मोहल्ले के सय्यद इक़बाल हुसैन ज़ैदी वल्द सय्यद ज़ुल्फ़िक़ार हुसैन ज़ैदी का अभी अभी इंतेक़ाल हो गया |  तद्फीन कल सुबह 9 बजे उनके आबाई क़ब्र...
 पोस्ट लेवल : death Death news
Kajal Kumar
18
 पोस्ट लेवल : मौत vote ताबूत death coffin वोट
मुकेश कुमार
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डरकोरोना नहीं होतापरकोरोनाहोती है वजहमरने कीमरने सेडर तो लगताही है नहां,भूख भीमरने कीवजह हो सकती हैभूखे लोगडरे रहते हैं किमर न जाएंडरे लोगदुबके हैंपर भूख और डर की समग्रताकरवा रही हैसफरकोरोना पीड़ितमर ही जायेंगे क्या?शायद नहींपरभूख पक्कामारती हैकाशइतने अन्योन्याश्रय...
munendra  gaur
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हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता राज कपूर (raj kapoor) के बेटे और पृथ्वीराज कपूर (Prithviraj Kapoor) के पोते और अभिनेता रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) के पिता ऋषि कपूर जिनका 30 अप्रैल 2020 को बोन मेरो कैंसर के चलते 67 वर्ष की आयु में देहान्‍त हो गया तो आइये जानते हैं ऋषि...
munendra  gaur
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हिंदी भाषा सहित अंग्रेजी भाषा की भी कई फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता इरफान खान (irrfan khan) का 29 अप्रैल 2020 को मुम्‍बई में निधन हो गया वह 53 साल के थे और लंबे समय से एक दुलर्भ किस्म के कैंसर से जंग लड़ रहे थे इरफान को 2018 में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर हुआ था तो...
MediaLink Ravinder
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लुधियाना से गौरीगंज:टेक्सी ने लिए 18 हज़ार रूपये लुधियाना// गौरी गंज (अमेठी): 18 अप्रैल 2020: (रेक्टर कथूरिया//कामरेड स्क्रीन):: लॉक डाउन और कर्फ्यू की घोषणा हुई तो हर तरफ सन्नाटा सा छा गया। हर रोज़ कमा कर खाने वाले मजदूरों के लिए एक ऐसी मुसीबत खड़ी हो गई जो...
आदित्य सिन्हा
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K for Kiss of DeathAditya Sinha13.04.2020
आदित्य सिन्हा
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D for Death - Death is the beginningAditya Sinha04.04.2020
दिनेशराय द्विवेदी
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17 मार्च तक अदालत में कामकाज सामान्य था। 18 को जब अदालत गया तो हाईकोर्ट का हुकम आ चुका था, केवल अर्जेंट काम होंगे। अदालत परिसर को सेनीटाइज करने और हर अदालत में सेनीटाइजर और हाथ धोने को साबुन का इन्तजाम करने को कहा गया था, वो नदारद था। काम न होने से हम मध्यान्ह की च...
दिनेशराय द्विवेदी
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दुखते हुए जख्मों पर हवा कौन करे,इस हाल में जीने की दुआ कौन करे,बीमार है जब खुद ही हकीमाने वतन,तेरे इन मरीजों की दवा कौन करे ... किस शायर की पंक्तियाँ हैं ये, पता नहीं लग रहा है। पर जिसने भी लिखी होंगी, जरूर वह जख्मी भी रहा होगा और मुल्क के हालात से परेशान भी।...