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Devendra Gehlod
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यह कविता मैंने करीब चार साल पहले 2011 में लिखी थी । यह उनकी timeline से लिया गया है देवेन्द्र गेहलोदकुछ दिनों से समाचार पत्रों में इंदौर में हुई घटनाओं को पढकर बड़ा अफ़सोस होता है जहा हर शहरवासी दूसरे पर आसानी से भरोसा कर सकता था हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल दी जाती थ...
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Devendra Gehlod
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उस सुनी राह पे वो अकेला मौजूद हैभले वो इंसान नहीं लेकिन उसका भी वजूद हैफैली हुई है उसकी सब शाखेउसे सिर्फ ज़माने का भला करना मंज़ूर हैहोते है उसपे हमले तो हुआ करेउसे तो बस नेकी किये जाने का सुरूर है - देवेन्द्र देव Roman Us suni raah pe wo akela moujud haibhale wo ins...
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Devendra Gehlod
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खवाबो में आते है, आखिर कुछ तो बात होगीजाते हुए भी मुड़ते जाते है, आखिर कुछ तो बात होगीये दिल ठिकाने पे नहीं, न जाने क्या वजह हैहर जगह टकराते है वो, आखिर कुछ तो बात होगीसोचकर के हैरां हूँ सारे सिलसिलो कोहर सिलसिले में एक कड़ी है, आखिर कुछ तो बात होगीमै उन्हें मुतास्सि...
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Devendra Gehlod
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वो तेरी आँखे वो तेरा चेहरातेरी आँखों सा प्यार तेरा गहरा मेरे हर गुनाह को माफ कर देनाबना दिया मेरी शोहरत का पन्ना सुनहरामेरे जिस्म से छूकर तेरी खुशबु आयेतू दूर है तो मै हू प्यासा सहरा - देवेन्द्र देवwo teri aankhe wo tera chehrateri aankho sa pyar tera gahramere ha...
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एक आस जगी आज मन मेंदिल कि बात है दबी आज मन मेंकभी तो ये आग उगलेगाअपनी कमान ये खुद लेगाबहुत सह लिया हमने भीअब तो खून लगा है उबलने भीहर किसी के नाम पर खेल हैयह बस वोटो की रेलमपेल हैवो कुर्सी पर आये सब भूल गएवादे सारे पहली बारिश में धुल गएसुना है नया कोई कानून आएगातोड़...
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Devendra Gehlod
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आँखों से अश्क छिपाते-छिपाते सारा दामन भीग गया |ऐसा लगा की अज मै कुछ हारकर भी सब जीत गया ||Purchase Shayari Books
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Devendra Gehlod
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हवा का झोका हू तुझे छुकर निकल जाऊँगादेर न लगी तेरे दिल में यु उतर जाऊंगानजरो के सामने रहूँगा हर पलनिगाहों में यु बसर कर जाऊंगामुझसा न मिलेगा कोई चाहने वालातू भले पत्थर हो मै मोम कर जाऊंगाजो कभी दूर भी हुआ तुझसेयाद करोगे हमें कुछ ऐसा असर कर जाऊंगा - देवेन्द्र 'देव'P...
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Devendra Gehlod
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पत्थरो की लकीरों सी है मेरे हाथ की लकीरेउभर के मिट जाती है जज्बात की लकीरेकभी हाथ की लकीरों में तो कभी तुझमे खोजते है हाथ की लकीरेखुद मिट जाती है तो मिटा जाती है हालात की लकीरेशहमात का खेल खेलती है जिन्दगी में लकीरेफिर क्यों उभर आती है बिना बात की लकीरेPurchase Sha...
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Devendra Gehlod
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वो भले वादा करके मुकर जायेंगेपर हमें यकीं है, पुकारे तो ठहर जायेंगेहै भले आज लबो पे उनके नापर हमारे इश्क के कशीदे भी कभी असर लायेंगेभले फेर ले रुख अपना हमें देखकरपर एक दिन वो हमारे सायो से लिपटते नज़र आयेंगेलगता है हम ही है उनके इश्क में पागलपर एक दिन वो भी बैचैन नज़...
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