ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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जेनयु  हिंसा: नए दुश्मन तलाशती सर्वनाशी राजनीति— प्रताप भानु मेहतायह तिहरे अर्थ में सर्वनाशी है. मीडिया के सहयोग से गृह मंत्री के बढ़ावे से “टुकड़े टुकड़े गैंग” मुहावरे का सामान्यिकरण किये जाने ने, बहसों में इस तरह की हिंसा की ज़मीन तैयार की. प्रताप भानु मेह...
Bharat Tiwari
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अब यूपी को भी इंटरनेट बंदी की आदत होते जा रही है...रवीश कुमारदिल्ली के टीवी स्टुडियो थीम और थ्योरी की बहस में चले गए हैं, जबकि ग्राउंड पर अब भी कहानियां आप तक पहुंचने के लिए सिसक रही हैं. 18 साल के आमिर हंज़ला को उसके पिता टीवी के डिबेट से लेकर पटना की गलियों म...
Bharat Tiwari
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‘आइटी सेल’ मानसिकता का विषाणु उदारवाद, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की पक्षधरता का दावा करनेवाले के मस्तिष्क को भी संक्रमित कर रहा है — प्रकाश के रेसम्पादकीयरवीश कुमार के सम्मान से चिढ़ क्यों!— प्रकाश के रेपिछले महीने जब रवीश कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत...
S.M. MAsoom
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जौनपुर के इतिहास के बारे में कुछ बहुत बड़ी बड़ी गलतफहमियां है जिसमे से एक यह भी है |जौनपुर आज़मगढ़ हाइवे पर सिपाह चौराहे से जब आप गुज़रते हैं तो आपकी नज़रें एक आलिशान मक़बरे की तरफ ज़रूर जाएंगी | इस मक़बरे के इतिहास को हकीकत में बहुत कम लोग जानते है और अक्सर इसे लोग दिल्ली...
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S.M. MAsoom
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विश्व के हर शहर हर देश का अपना एक इतिहास होता है जिसमे सत्ता हासिल करने के लिए आपसी युद्ध और समझोतों की बहुत बड़ी भूमिका हुआ करती है | बहुत बार सभ्यताएं बदल जाती हैं आबाद शहर खंडहरों में और खंडहर आबादी में बदल जाय करते हैं | शासक कोई भी हो उसका भी अपना एक धर्म...
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S.M. MAsoom
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इमाम हुसैन ने आशूर के दिन शहादत के कुछ पहले खुत्बा दिया जिसमे उन्होंने कोशिश की कि यह लश्कर ऐ यज़ीद राह ऐ हक़ पे आ जाय लेकिन जब इमाम खुत्बा देते लश्कर ढोल बजने लगते जिस से ना वे सुनें खुत्बा और न लश्कर के सिपाही सु...
 पोस्ट लेवल : editorial
S.M. MAsoom
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वो खुशनसीब होता है जिसके घर वाले पति पत्नी भाई बहन उसके सुख दुःख के साथी होते हैं लेकिन कुछ बदनसीब होते हैं जिन्हे अपने ही घर में परिवार में अपनापन नहीं मिलता और वे मजबूर हो जाते हैं गैरों के साथ मिलजुल के खुश रह...
 पोस्ट लेवल : editorial
S.M. MAsoom
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); क्या अली (अ ) के विचारों, अक़वाल और वसीयतों को सिर्फ इमामबाड़ों और मिम्बरों तक महदूद करके हम अली वाले और मोमिन कहलायेंगे ?एस एम् मासूम आज हज़रत अली (अ ) की शहादत के १४०० साल हो गए और इन १४०० सालो से हज़रत अली के...
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S.M. MAsoom
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); मान्यता है कि कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब जब पहाड़ों पर चलते थे तो उनके पैरों के निशान शिला पर अंकित हो जाते थे। आज भारत में ऐसे अनगिनत क़दम ऐ रसूल के निशानात आपको मिलेंगे जिनमे से अधिकतर बादशाओं और उनसे जुड़े लोगो...
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S.M. MAsoom
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दुनिया हमारे व्यवहार से किरदार से , हमारे  धर्म की किताब और हमारे धर्म के महापुरुषों को पहचानती है और हम धर्म की किताब से और अपने धर्म के महापुरुषों की तारीफ से खुद को पहचनवाने की मूर्खता करते हैं  और अपने धर्म...
 पोस्ट लेवल : Editorial