ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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भारतीय पॉप संगीत की महारानी उषा उथुप की जीवनी ‘उल्लास की नाव’ का लोकार्पणविकास कुमार झा ने अथक प्रयासों से इस जीवनी को तैयार किया है जिसमें उषा उथुप के जीवन के लगभग हर पहलू को वे सामने ला सके हैं।(ब्यूरो)भारत में पॉप संगीत को एक नया आयाम, नई ऊंचाई देने वालीं उषा उथ...
Bharat Tiwari
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योगिता यादव की लेखनी को मैं सदैव कहानी की विषयवस्तु को बिलकुल ताज़ा लिखने वाली मानता हूँ ,'नई देह में नए देस में' उन्होंने मेरी यह धारणा और मजबूत की हैं, उन्हें बधाई देता हूँ.भरत एस तिवारी "दो औरतें जब आपस में मिलना चाहती हों तो उन्‍हें मिलने देना चाहिए। किसी को भी...
Bharat Tiwari
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आसमान खुला तो नहीं था उस वक्त भीलेकिन बचपन की यादों में शायद धुआं नहीं होतापंकज राग की कवितापटना: ‘ढूंढ़ोगे अगर मुल्कों मुल्कों’राजेंद्र नगर के उस छोटे से पहले माले के फ्लैट के सामनेएक पतली सी सड़क थीजिसके उस पार कुछ झाड़ झंखारों के बीचएक पोखर था जिसमें सुबह सुबह कमल...
Bharat Tiwari
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रवींद्र कालिया की कहानियों से मैं चमत्कृत था; उनकी भाषा, उनका यथार्थ के प्रति सुलूक, उनकी मध्यवर्गीय भावुकताविहीनता, उनका खिलंदड़ा अंदाज, इन सब तत्वों ने मुझ पर असर डाला था । दूसरी बात यह कि जब कोई नया लेखक किसी बड़े साहित्यकार के निकट होता है तो वह उसकी श्रेष्ठता...
Bharat Tiwari
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अधिकतर ऐसा ही हुआ : कोई कालिया जी मिला और उनका होकर ही रुखसत हुआ । उनका अत्यंत महत्वपूर्ण लेखक होना, आकर्षक अनोखा व्यक्तित्व, उनका वातावरण में देर तक गूंजते रहने वाला ठहाका, बढ़िया आवाज और कथन में अप्रत्याशितता, चुस्ती, यारबाशी, चुटीलेपन का सम्मिश्रण - ये सब तत्व म...
Harshit Varshney
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मनीष कुमार
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पंडाल परिक्रमा की अंतिम कड़ी में आपको दिखाते हैं राँची के अन्य उल्लेखनीय पंडालों की झलकियाँ। रेलवे स्टेशन, रातू रोड, ओसीसी व बकरी बाजार के बाद जिन  पंडालों  ने ध्यान खींचे वो थे बाँधगाड़ी, काँटाटोली व हरमू के पंडाल।बाँधगाड़ी में दुर्गा जी के आसपास...
Bharat Tiwari
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बाकी बहुत ज़्यादा बातें तो मैं जानती नहीं,पर जो समझ पाती हूं वो और हैऔर जो समझाई जाती हूं वो और है...अंडा-करी और आस्थादामिनी यादव की कविताआज वर्जित वार है,मैंने दिन में अंडा-करी खाई थीऔर शाम को दिल चाहा,इसलिए अपने घर के मंदिर में,बिना दोबारा नहाए ही जोत भी जलाई थी,...
मनीष कुमार
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राँची के सबसे नामी पंडालों में बकरी बाजार अग्रणी हैं। सामान्यतः यहाँ के पंडाल अपनी विशालता और वैभव के लिए ज्यादा और महीन कलाकारी के लिए कम जाने जाते हैं। इस बार यहाँ सतरंगा पंडाल सजा जिसकी थीम थी बढ़ती जनसंख्या के बीच आम जनों का संघर्ष ! रंगों से भरे पंडाल में अपनी...
मनीष कुमार
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बांग्ला स्कूल का पंडाल राँची के अन्य बड़े पंडालों जितना प्रसिद्ध भले ना हो पर यहाँ कलाप्रेमी अक्सर कुछ अलग सा देखने के लिए जाते जरूर हैं। इस बार वहाँ पुतलों की दुनिया सजी थी।  पंडाल की दीवारें सिंदूरी रंग में सजी थीं। दीवारों के गोल नमूनों को बीचों बीच बल्ब से...