ब्लॉगसेतु

Hari Mohan Gupta
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आज पीड़ा हो गई इतनी सघन, नीर बन कर अब बरसना चाहियेl        चारों तरफ ही मच रहा कुहराम है,       शान्ति को मिलता नहीं विश्राम है,       आज रक्षक  ही  यहाँ  भक्षक...
 पोस्ट लेवल : Geet
सतीश सक्सेना
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मुर्दा हुए शरीर को , जीना सिखाइये !रोते हुए ज़मीर को , पीना सिखाइये !थोड़े से दर्द में ही,क्यूँ ऑंखें छलक उठी गुंडों की गली में इन्हें , रहना सिखाइये ! गद्दार कोई हो,मगर हक़दार सज़ा के उस्ताद, मुसलमां को ही चलना सिखाइये  !अनभिज्ञ निरक्षर निरे ...
rishabh shukla
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नमस्कार,स्वागत है आप सभी का यूट्यूब चैनल "मेरे मन की" पर|"मेरे मन की" में हम आपके लिए लाये हैं कवितायेँ , ग़ज़लें, कहानियां और शायरी|आप अपनी रचनाओं का यहाँ प्रसारण करा सकते हैं और रचनाओं का आनंद ले सकते हैं| #meremankee के YouTube चैनल को सब्सक्राइब करना...
rishabh shukla
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#MereManKeeमेरा नाम ऋषभ शुक्ला है| मैं एक छाया चित्रकार, यात्री और चिट्ठा लेखक हूँ| मुख्य रूप से मुझे लिखना-पढ़ना, घूमना-फिरना और विभिन्न चीजों को कैमरे मे कैद करना पसंद है| मुझे कुछ नया करना पसंद है| इस चैनल के माध्यम से मैं ऐसे ही अनेक वीडियो के साथ प्रस्तुत हूँ|...
Hari Mohan Gupta
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मन्दिर के पट बंद कर दिए, कैसे हम दर्शन कर पायें,उनकी छवि जो बसी हृदय में, कैसे हम वन्दन कर पायें|            आये हैं हम बहुत दूर से,केवल दर्शन की अभिलाषा,         &n...
 पोस्ट लेवल : Geet
संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : Rajyageet Narendra Dev Verma
Hari Mohan Gupta
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जुगनू जैसा है प्रकाश बस,मिटा न तिल भर भी अँधियारा ,गर्व बढाया मन में इतना,सूरज को तुमने ललकारा।        यह गर्वोक्ति न ले लो मन में,        तुम्हीं बड़े हो सारे जग में,    &nbsp...
 पोस्ट लेवल : Geet
rishabh shukla
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रास्ते जीवन की डगर पर मुश्किलें कई है,बस है चलते जानाlइसने तो निकलने का,कोई तो रास्ता होगाllयदि कोई मुँह मोड़ ले,इस मुश्किल घड़ी मे ना घबरानाlकोई मिले तुमसे अगर, कोई तो वास्ता होगाllमेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/घुमन्तू - https://th...
Hari Mohan Gupta
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          दीपक    दीपक तल में तम आश्रित कर,             जग  में उजयारे को बाँटो,   प्रेम और सदभाव ज्योति में,   &nb...
 पोस्ट लेवल : Geet
sanjiv verma salil
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एक रचना*महरी पर गड़तीगृद्ध-दृष्टि साहो रहा पर्यावरण*दोष अपना और पर मढ़सभी परिभाषा गलत पढ़जिस तरह हो सीढ़ियाँ चढ़  देहरी के दूरमिट्टी गंदगी साकर रहे हैं आचरण*हवस के बनकर पुजारीआरती तन की उतारीदियति अपनी खुद बिगाड़ीचीयर डालाअसुर बनकरमाँ धरा का...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet