ब्लॉगसेतु

Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : ghazal waseem-barelavi
Hari Mohan Gupta
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राम नामी ओढ़ कर, मैं ठग रहा होता जगत को,          किन्तु मानव धर्म से  ही, हारता हरदम रहा बस l               चाहता तो यह सफर मैं, पार कर लेता मजे से,&n...
 पोस्ट लेवल : Ghazal
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : aman-chandpuri ghazal
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : ghazal zafar-kamali
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : ghazal rukhsana-siddiqui
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : kamlesh-bhatt-kamal ghazal
अभिषेक ठाकुर
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वो ख़ुशामदी की आब-ओ-हवा बताते रहेसनक को भी बादशाह की अदा बताते रहेअंतिम तिनके के भी हाथ से छूटने तलकवो ख़ुद को हमारा ना-ख़ुदा बताते रहेवो जानते थे हमारे जुनून-ए-इश्क़ की इंतेहापर आँखों में आखें डाल बेवफ़ा बताते रहे वो लफ़्ज़ों का हमारे गला रेतने के बाद पलकों की हलचल...
 पोस्ट लेवल : Kavita Ghazal
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : rahat-indori ghazal audio-video
Devendra Gehlod
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Sanjay  Grover
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ग़ज़लकोई पत्ता हरा-सा ढूंढ लियातेरे घर का पता-सा ढूंढ लियाजब भी रफ़्तार में ख़ुद को खोयाथोड़ा रुकके, ज़रा-सा ढूंढ लियाउसमें दिन-रात उड़ता रहता हूंजो ख़्याल आसमां-सा ढूंढ लियाशहर में आके हमको ऐसा लगादश्त का रास्ता-सा ढूंढ लियातेरी आंखों में ख़ुदको खोया मगरशख़्स इक लापता-सा...