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sanjiv verma salil
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हाइकु(एक प्रयोग)*भोर सुहानीफूँक रही बेमोलजान में जान। .*जान में जानआ गयी, झूमी-नाचीबूँदों के साथ।*बूँदों के साथजी लिया बचपनआज फिर से।*आज फिर सेमचेगा हुडदंगसंसद सत्र।*संसद सत्रदुर्गन्ध ही दुर्गन्धफैलाओ इत्र।***१४-७-२०१७salil.sanjiv@gmail.com#हिंदी_ब्लॉगिंग#हिंदीब्लॉ...
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हाइकु सलिला *ध्यान में ध्यान ध्यान पर न ध्यान तभी हो ध्यान। *मुक्ति की चाहरोकती है हमेशामुक्ति की राह।*खुद से ऊबकैसे पायेगा राह?खुद में डूब।*१३-७-२०१७salil.sanjiv@gmail.com#हिंदी_ब्लॉगिंगhttp://divyanarmada.blogspot.in/
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हाइकु सलिला *कल आएगा? सोचना गलत हैजो करो आज। *लिखो हाइकुकागज़-कलम लेहर पल ही।*जिया में जियाहर पल हाइकुजिया ने रचा।*चाह कलममन का कागज़भाव हाइकु।*शब्द अनंतपढ़ो-सुनो, बटोरोमित्र बनाओ।*शब्द संपदाअनमोल मोती हैंसदा सहेजो।*श्वास नदियाआस नद-प्रवाहप्रयास नौका।**...
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विशेष लेख:जापानी छंद हाइकु : एक परिचय आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*हाइकु सामान्यतः ३ पंक्तियों की वह लघु काव्य रचना है जिसमें सामान्यतः क्रमश: ५-७-५ ध्वनियों का प्रयोग कर एक अनुभूति या छवि की अभिव्यक्ति की जाती है। हिंदी को त्रिपदिक छंदों की विरासत संस्कृत से मिल...
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भोजपुरी हाइकु: संजीव वर्मा 'सलिल'*पावन भूमि / भारत देसवा के / प्रेरण-स्रोत.भुला दिहिल / बटोहिया गीत के / हम कृतघ्न.देश-उत्थान? / आपन अवदान? / खुद से पूछ.अंगरेजी के / गुलामी के जंजीर / साँच साबित.सुख के धूप / सँग-सँग मिलल / दुःख के छाँव.नेह अबीर / जे के मस्तक पर / व...
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*मैथिली हाइकुस्नेह करबहमर मंत्र अछिगले लगबै*http://divyanarmada.blogspot.in/
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हाइकु गीत:आँख का पानीसंजीव 'सलिल'*आँख का पानी,मर गया तो कैसेधरा हो धानी?...*तोड़ बंधनआँख का पानी बहा.रोके न रुका.आसमान भीहौसलों की ऊँचाईके आगे झुका.कहती नानीसूखने मत देनाआँख का पानी....*रोक न पायेजनक जैसे ज्ञानीआँसू अपने.मिट्टी में मिलारावण जैसा ध्यानीटूटे सपने.आँख...
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श्रद्धा सहित*वृष देव कोनमन मनुज कासदा छाँव दो*'सलिल' सुमिरप्रभु पद पद्मों कोबन भ्रमर*सब में रबकभी न भूलनारब के सब*ईंट-रेट कामंदिर मनहरईश लापता*मितवा दूँ क्य?क्षण भंगुर जगभौतिक सारा*है उद्गातामनुज धरम कीभारत माता*(रचना काल १९९८)http://divyanarmada.blogspot.in/
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हाइकु मुक्तिका-संजीवनव दुर्गा का, हर नव दिन हो, मंगलकारीनेह नर्मदा, जन-मन रंजक, संकटहारीमैं-तू रहें न, दो मिल-जुलक,र एक हो सकेंसुविचारों के, सुमन सुवासित, जीवन-क्यारीगले लगाये, दिल को दिल खिल, गीत सुनायेहों शरारतें, नटखटपन मन,-रञ्जनकारीभारतवासी, सकल विश्व पर, प्यार...
sanjiv verma salil
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हाइकु गीत *बोल रे हिंदी कान में अमरित घोल रे हिंदी *नहीं है भाषाहै सभ्यता पावनडोल रे हिंदी*कौन हो पाएउऋण तुझसे, देमोल रे हिंदी?*आंग्ल प्रेमी जोतुरत देना खोलपोल रे हिंदी*झूठा है नेताकहाँ सच कितना?तोल रे हिंदी*बहुत हुआअब न काम में होझोल रे हिंदी*स...
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