ब्लॉगसेतु

Mahesh Barmate
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तुम्हें वो याद करता हैहाँ! फरियाद करता है।वो इश्क़ में तेरेउस दिन का इंतज़ार करता हैजिस दिन दिल से वो कहेकि वो सिर्फ तुमसे ही प्यार करता है।तेरी हाँ और न का उसे कोई फर्क नहीं है अबकि रूह के आशिक़ के पास कोई शर्त नहीं है अब।कुरबतें उसकी जरूरत नहीं थी कभीबस मुहब्बत में...
rishabh shukla
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कोरोना वायरस क्या है? इसकी उत्पत्ति कहाँ और कैसे हुई?कोरोनावायरस (Coronavirus) कई वायरसो का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग के कारक होते हैं। यह आरएनए वायरस होते हैं। मानवों में यह श्वास तंत्र संक्रमण&...
यूसुफ  किरमानी
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मुँह पर साफ़ा बाँधे गुंडों की पहचान कैसे होगीवे सिर्फ जेएनयू में नहीं हैंवे सिर्फ एएमयू में नहीं हैंवे सिर्फ जामिया में नहीं हैंवे कहाँ नहीं हैंवे अब वहां भी है, जहां कोई नहीं है वे तो बिजनौर,मेरठ से लेकर मंगलौर तक में हैवे चैनलों में हैंवे अखबारों में हैंवे मंत्रा...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Hindi Poetry Hindi Kavita Politics
Juban-ए- दास्तां
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मज़दूरों के हथौड़ी ठोंकने की आवाज़,सब्जीवाले की दाम चीख़ती आवाज़,विश्वविद्यालयों कीगूँजती बेक़रार आवाज़,सुबह-सुबह अज़ान और मुकद्दस भजनों की आवाज़,बस्तियों में ढील हेरती युवतियों की आवाज़,सड़कों पर कोलतार बिछाते रोडरोलर की आवाज़,पोखरों में नंगे नहाते बच्चों की आवाज़,खेत को मथते ...
 पोस्ट लेवल : Independence day कविता Hindi Kavita Tarpan Patrika
Juban-ए- दास्तां
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आज मैं, वो नहीजो पहले थामैं बदल चुका हूं..........पहले था सीधा साधा, नेकदिल, विश्वासी, संजिदगी भरापर आज कितना बदल चुका हूँ ।माया के जंजीरों से जकड़ चुका हुँ ।देखता मौका हूँ,जब मिलता,मार लेता हूँ ।आजछिप गया है पाप मुझमे,मानसिक विकार मुझमे,पैसे का प्यार मुझें,ठगने का...
 पोस्ट लेवल : कविता Hindi Kavita Shayari
Juban-ए- दास्तां
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तुम कहते हो महिला की कोई जाति नहीं होती। फिर शोषण की कैसे अपनी जाति हो सकती है।तुम कहते हो आज के दौर में कहाँ है जातिवाद फिर क्यों हमें पायल तडवी की तरह मौत दे देते हो तुम ना जानो दर्द हमारा, आकर देखो फिर बोलोतुम्हे बस आता है हम पर व्यंग्य करनातुम क्या जानो समस्या...
 पोस्ट लेवल : कविता Hindi Kavita Teena karmveer Priyanka reddy
rishabh shukla
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Ram Janm Bhumi Ayodhyaराम लला अब आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे|ज़न मानस मन भायेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे||मंदिर वहीं बनाएंगे... तुम हो करुणा सागर, मर्यादापुरुषोत्तम सब के प्रिय, तेरी अमिट छवि है हर हृदय मे, बाट जोहती सबकी आँखे, अब मेरे...
rishabh shukla
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Har Ghar Me Vibhishana Baitha Haiअब बड़ी मुश्किल है लड़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है|मुश्किल है अब चढ़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है||तुम सेंध लगाए बैठे थे,किसी दूसरे के घर पर,कोई तुम्हारा घर ही लूट गया,हर घर में विभीषण बैठा है||तुम हो वीर, शक्तिशाली,रण तुमसे घबराता है|फि...
rishabh shukla
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Aloneना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|मैं अकेला हूँ...ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई हमदर्द नहीं है|मैं अकेला हूँ....कोई कैसे इतना,उलझ जाता है जिंदगी में,की भूल जाता है,कि कोई...
rishabh shukla
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Journeyक्या तुम मुझसे मिल कर, यूँ ही खो जाते हो|वैसे ही सपनों के समंदर मे, गोते खाते हो||इस जीवन पथ पर.... जैसे मैं घुल जाती हूँ, तेरे यादो, जज्बातों मे|जैसे कई लोग मेरे कानो मे,सुन्दर गीत गाते हैं||इस जीवन पथ पर..... क्या तुम भी रोते हो,&n...