ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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कोरोना वायरस क्या है? इसकी उत्पत्ति कहाँ और कैसे हुई?कोरोनावायरस (Coronavirus) कई वायरसो का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग के कारक होते हैं। यह आरएनए वायरस होते हैं। मानवों में यह श्वास तंत्र संक्रमण&...
rishabh shukla
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Ram Janm Bhumi Ayodhyaराम लला अब आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे|ज़न मानस मन भायेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे||मंदिर वहीं बनाएंगे... तुम हो करुणा सागर, मर्यादापुरुषोत्तम सब के प्रिय, तेरी अमिट छवि है हर हृदय मे, बाट जोहती सबकी आँखे, अब मेरे...
rishabh shukla
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Har Ghar Me Vibhishana Baitha Haiअब बड़ी मुश्किल है लड़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है|मुश्किल है अब चढ़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है||तुम सेंध लगाए बैठे थे,किसी दूसरे के घर पर,कोई तुम्हारा घर ही लूट गया,हर घर में विभीषण बैठा है||तुम हो वीर, शक्तिशाली,रण तुमसे घबराता है|फि...
rishabh shukla
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Aloneना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|मैं अकेला हूँ...ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई हमदर्द नहीं है|मैं अकेला हूँ....कोई कैसे इतना,उलझ जाता है जिंदगी में,की भूल जाता है,कि कोई...
rishabh shukla
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Journeyक्या तुम मुझसे मिल कर, यूँ ही खो जाते हो|वैसे ही सपनों के समंदर मे, गोते खाते हो||इस जीवन पथ पर.... जैसे मैं घुल जाती हूँ, तेरे यादो, जज्बातों मे|जैसे कई लोग मेरे कानो मे,सुन्दर गीत गाते हैं||इस जीवन पथ पर..... क्या तुम भी रोते हो,&n...
rishabh shukla
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कि प्यार नहींग़र प्यार का इजहार ना हो, तो वो प्यार नहीं|क्या हुआ जो तुमको, मुझ पर ऐतबार नहीं||एक बार ऐतबार तो करो, पूरी शिद्दत से|फिर कह ना पाओगे, कि प्यार नहीं||तुमने ना किया भरोसा, हम पर|लेकिन तेरी बेवफाई से, मुझे कोई ऐतराज नहीं||मेर...
kuldeep thakur
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
भावना  तिवारी
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
rishabh shukla
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कभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लामेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/घुमन्तू - https://theshuklaj...