ब्लॉगसेतु

यूसुफ  किरमानी
192
मुँह पर साफ़ा बाँधे गुंडों की पहचान कैसे होगीवे सिर्फ जेएनयू में नहीं हैंवे सिर्फ एएमयू में नहीं हैंवे सिर्फ जामिया में नहीं हैंवे कहाँ नहीं हैंवे अब वहां भी है, जहां कोई नहीं है वे तो बिजनौर,मेरठ से लेकर मंगलौर तक में हैवे चैनलों में हैंवे अखबारों में हैंवे मंत्रा...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Hindi Poetry Hindi Kavita Politics
Rajeev Upadhyay
338
डाकिए ने थाप दी हौले से आज दरवाजे पर मेरे कि तुम्हारा ख़त मिला। तुमने हाल सबके सुनाए ख़त-ए-मजमून में कुछ हाल तुमने ना मगर अपना सुनाया ना ही पूछा किस हाल में हूँ? कि तुम्हारा ख़त मिला। बता क्या जवाब दूँ मैं तुमको?&...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
दोस्ती दुश्मनी का क्या? कारोबार है ये। कभी सुबह कभी शाम तलबगार है ये॥ कि रिसालों से टपकती है ये कि कहानियों में बहती है ये। कभी सितमगर है ये और मददगार भी है ये॥इनके होने से आपको जीने की वजह मिलती और इस तरह चेहरे के...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
कभी हम सौदा-ए-बाज़ार हुए कभी हम आदमी बीमार हुए और जो रहा बाकी बचा-खुचा उसके कई तलबगार हुए॥ सितम भी यहाँ ढाए जाते हैं रहनुमाई की तरह पैर काबे में है और जिन्दगी कसाई की तरह॥अजब कशमकश है दोनों जानिब मेरे एक आसमान की बुलंदी क...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस जाते हैं। पर जगह कहां वो ये सवाल ही अभी उठा नहीं की आदमी...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
तूफान कोई आकर क्षण में चला जाता है पर लग जाते हैं बरसों हमें समेटने में खुद को संभला ही नहीं कि बारिश कोईजाती है घर ढहाकर।ये सिलसिला हर रोज का हैऔर कहानी में समय की लकीर कोखींचकर बढाते हैंघटाते हैंकि होने का मेरे मतलबआकर कोई रोज कह जाता है।-----...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
कुछ चेहरेबस चेहरे नहीं होतेसूर्ख शर्तें होती हैं हमारे होने की। कुछ बातेंबस बातें नहीं होतींवजह होती हैं हमारे होने की। और बेवजह भी बहुत कुछ होता हैजिनसे जुड़ी होती हैंहमारी साँसें होने की।तो क्या कर इन्हें मैं याद करूँकि जीते रहें ये यूँ करकि रहे खबर मुझे...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
समय की ही कहानी कह रहे हैं सभीपशु, आदमी या हो फिर कोई चींटी।हेर-फेर है किरदारों में बसकि आइने की अराइश सेबह रही हैं स्वर लहरियाँ कईजो होकर गुजरती हैं कानों से सभी।समय की ही कहानी कह रहे हैं सभी॥उन स्वरों से धुन कई हैं निकलतींजो कहानी बनकर हैं पिघलतींऔर इस तरह हर आँ...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
सूरज! तू क्या संग लाया है?आशाओं को,क्या पीली किरणों में बिखराया है?सूरज! तू क्या संग लाया है?सांसें जोबोझिल हैं अब तकउनको क्या तू सहलाया है?सूरज! तू क्या संग लाया है?मरते मन मेंक्या किरणें तेरीज्योति नई भर लाई हैं?विकल मनचंचल तन को क्यास्निग्ध सुधा से नहलाई हैं?सूर...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
338
मेरे घर का मेरा वो कोनाजो अब तुम्हारा हो चुका हैमुझमें तेरे होने की वही कहानी कहता हैजो कभी माँपिताजी के साथ सुनती थीऔर ईया बाबा को बताती थीं। कुछ भी नया नहीं है;ना झगड़ाना ही बातें प्यार की। पीढ़ियों से हम वही बातें कहते आ रहे हैंसफर वही चलता जा...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature