ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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लाल साड़ी में लिपटी लड़कियाँ एक दहलीज पार कर किस अरण्य में हमेशा के लिए खो जाती है कोई जानना नहीं चाहता... कथा-कहानी सुनाने बैठी सयानी औरतें अक्सर कहती हैं, घर के बियाबान से कभी कोई स्त्री जीवित नहीं लौटी... निसंगजयश्री रॉय की हिंदी कहानी  सात दिन से ल...
Bharat Tiwari
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भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) की युवा मीडिया एजुकेटर लेखक विष्णुप्रिया पांडेय लिखने का शौक़ और कथक नृत्य में रूचि रखती हैं. आइये विष्णुप्रिया की छोटी हिंदी कहानी, 'वह कौन थी!' पढ़ते हुए 'नई क़लम' में उनका स्वागत कीजिये...भरत एस तिवारी/शब्दांकन संपादकवह कौन थी!विष्णुप...
Bharat Tiwari
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Hindi Story 'Shatranj ke Khiladi' — Munshi Premchandमुंशी प्रेमचंद की हिन्दी कहानीशतरंज के खिलाड़ीवाज़िदअली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, गरीब-अमीर— सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मज़लिस सजाता था, तो कोई अफीम की...
Bharat Tiwari
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छोटी बच्चियों का, बेटियों का ख़ुद को बचा कर भागना क्या हमेशा ज़ारी रहेगा? कुसुम भट्ट की कहानी 'नदी की उँगलियों के निशान' पढ़िए। पहाड़ो के कहानीकारों की भाषा और सन्दर्भ क्या कुछ अधिक प्राणवायु भरे होते है? ... भरत एस तिवारी/शब्दांकन संपादकनदी की उँगलियों के निशान— कुसुम...
Bharat Tiwari
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वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला गर्ग डिप्रेशन पर अपनी कहानी (Hindi Story on Depression) के बारे में बताते हुए कहती हैं,भारत में सच्चे मनोचिकित्सक नहीं के बराबर हैं। उनका सिर्फ दवा पर निर्भर रहना और मरीज को न समझ पाना अवसाद बढ़ाता है, कम नहीं करता। (adsbygoogle = windo...
Bharat Tiwari
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कोई रिश्ता ना होगा तब — नीलिमा शर्मा की कहानीHindi Storyसुमन ने बहुत कोशिश की परतु उसकी आवाज़ नक्कारखाने में तूती सी रह गयी आखिर टेस्ट कराना ही पढ़ा और डॉक्टर ने “जय माता की” कहकर जैसे वज्रपात कर दिया राजीव और मांजी पर...अब सबके सुर बदल गये। नहीं !!&...
Bharat Tiwari
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देहरादून के युवा लेखक इंजीनियर रोहन सक्सेना और उनकी छोटी हिंदी कहानी, क़िस्सा 'शहतूत' का शब्दांकन के स्तंभ नई क़लम  में स्वागत है. दुआ है कि रोहन की क़िस्सागोई ख़ूब फलेफूले. शहतूतरोहन सक्सेना की हिंदी कहानी बात बहुत आसान है। आपकी और मेरी नींद म...
Bharat Tiwari
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शर्मिला बोहरा जालान चित्रकार कहानीकार हैं। उनकी कहानियों का चित्रकार बड़ा है और उसका कैनवास भी। शर्मिला की कहानियाँ सम्हल-सम्हलकर, कलम से कसे गए पेंचों को खोलते हुए पढ़ना आनंद देता है। वाह! पढ़िए कहानी ‘माँ, मार्च और मृत्यु’ ... भरत एस तिवारी/ शब्दांकन संपादकHind...
Rinki Raut
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बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे। सागवान के इस स्प्रिंगदार पलंग पर जो अब खिड़की के पास से थोड़ा इधर सरका दिया गया था एक घाटन लौंडिया रणधीर के साथ चिपटी हुई थी। खिड़की के पास बाहर पीपल के नहाए हुए पत्ते रात के दूधिया अंधेरे में झूमरों...
 पोस्ट लेवल : Hindi story
Bharat Tiwari
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दरअसल, हिंदुस्तान छोटे-छोटे उन क़िस्सों का देश है जो इसके निवासियों की तरह ही मासूम है। और हिंदुस्तान के बाशिंदों को ही, अपनी मासूमियत के बीच, दिमाग़ का इस्तेमाल करते हुए, इस देश की मासूमियत बनाये और बचाए रखनी होगी, इसे अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए। डॉ सच्चिदानंद ज...