ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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Manish K Singh
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१ .पता है दोस्त !वह भूख़ नहीं है !जो तुम्हें लगती है !तुम्हारें ब्रेकफास्ट और लांच के बीच !और न सबकी तपिश मिटा देने वाला पानी !मिटा पता है भूख़ !जानें दो तुम नहीं समझ सकते !२ .और पता है यार !जब सारी ज़ेबों को लगातार दस दिनों तक !खगालानें पर रोज निकलता हो दस का फटा नोट...
 पोस्ट लेवल : hunger unemployement Poverty नयी-कविता
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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It was office timeIt was office timeShrunken bellyTears in eyesThe starving childHopefully staredAt the passers byTo have mercy Give something to eatMake him surviveEverybody lookedPityingly at himNobody had time forThe starving childAvoiding fineReaching office in...
 पोस्ट लेवल : poverty child humanity Hunger Life