ब्लॉगसेतु

Sanjay  Grover
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लड़के को मैं भली-भांति जानता था, इसलिए उसके भोलेपन और मासूमियत का मुझे अंदाज़ा था। तबियत भी ख़राब रहती थी उसकी, लेकिन वो रसोई के काम बिना किसी मेल ईगो को बीच में लाए कर देता था। उसकी ऐसी ईगो दूसरे कुछ मामलों में ज़रुर देखने को मिलती थी। उसकी बहिनों के ब्वॉय-फ्रेंडस् थ...
rishabh shukla
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मेरे मन की शर्मा जी अभी-अभी रेलवे स्टेशन पर पहुँचे ही थे। शर्मा जी पेशे से मुंबई मे रेलवे मे ही स्टेशन मास्टर थे। गर्मीकी छुट्टी चल रही थी इसलिए वह शि...
Sanjay  Grover
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    ME      Started Fashion-designing without knowing cutting-tailoring in 1984 when people, including me, hardly knew fashion designing as an art or a career (in India's references), Convinced folk and friends to wear clothes designed...