ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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नव रात्रे चल रहे हैं.आजकल घन्सु मौन धरे हैं. नंगे पाँव रहते हैं. सुबह एक गिलास दूध पीते हैं. फिर सारा दिन पूजा पाठ में लिप्त रहते हैं. शाम को आदतानुसार चौक पर आते हैं पान की दुकान पर, मगर जुबान से बोलते कुछ नहीं, बस आँख से बतियाते हैं. बात बात पर मुंडी मटकाते हैं न...
समीर लाल
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तिवारी जी और घंसु देश की दोनों बड़ी पार्टियों का और तमाम आंचलिक पार्टियों का घोषणा पत्र पढ़ पढ़ कर तय कर रहे हैं कि किसमें से कौन सा हिस्सा उठाना है. इस तरीके से वो एक नया घोषणा पत्र तैयार कर रहे हैं. तिवारी जी और घंसु ने मिलकर गैर मान्यता प्राप्त एक नई पार्टी बना ली...
समीर लाल
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यह उस आलेख का विस्तार है जो सन २००७ में लिखा था. माँ के गुजर जाने के पश्चात पहली बार पिता जी अकेले कनाडा आये हुए थे मेरे पास. समय भी अजब शै है. जब हम चाहते हैं कि जल्दी से कट जाये तो ऐसा रुकता है कि पूछो मत और जब चाहें कि थमा रहे, तो ऐसा भगता है कि पकड़ ही नहीं आ पा...
समीर लाल
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युवा अवस्था क्रांतिकारी होती है. क्रांति भी ऐसी कि बस विरोध करना है एक बड़ी भीड़ का. इस चक्कर में वो गाँधी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को नकार देता है. नेहरु के राष्ट्र निर्माण को नकार देता है. वो इतने विश्वास से यह बात कहता है कि अगर गाँधी ने नेहरु की जगह पटेल क...
समीर लाल
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रंग बिरंगी दुनिया मॆं कितने ही सफहें हैं अलग अलग रंगो के. हर वक्त हर व्यक्ति के लिए कोई न कोई नया रंग.  सब जोड़ कर देखो तो एक एकदम इन्द्रधनुषी दुनिया नजर आये. होना भी यही चाहिये.कल ही होली के रंगो से सारोबार मस्ति में नाचते गाते लोग आज उसी रंग के निशानों को दाग...
समीर लाल
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उस रोज सरकारी अधिकारी घंसु को साथ ले गये थे सुबह सुबह. घंसु को मंहगे साबुन से नहला धुला कर एक कमरे में कैमरे के सामने कुर्सी पर बैठा दिया गया. मंत्री जी आये और उसके सामने एक छोटी चौकी लगाकर बैठ गये. फिर मंत्री जी ने घंसु के धुले हुए पैर फिर से धोये, पोंछे और फिर उस...
समीर लाल
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आज सुबह जब नींद खुली तो खिड़की से झांक कर देखा. सूरज अपने चरम पर झिलमिल मोड में चमक रहा था. खुश हुए कि आज बड़े दिन बाद सही मौसम है. तैयार होकर जैसे ही बाहर निकले, लगा जैसे करेंट लग गया हो. भाग कर वापस घर में आये और ऐलेक्सा से पूछा कि क्या तापमान है? ऐलेक्सा अभी राजनि...
समीर लाल
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कक्षा ६ में मेरा सहपाठी राजू मेरा पड़ोसी बना क्लास में. वो निहायत बदमाश लेकिन चेहरे से एकदम दीन हीन और निरिह सा दिखने वाला. दिन भर तरह तरह की आवाज निकालता और सामने बैठे लड़कों की पीठ पर मेरे पैन से स्याही छिड़क देता. हरी स्याही का पैन सिर्फ मेरे पास था तो वो लड़के समझत...
समीर लाल
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'दिल-ए-बेरहम, माल-ए-मुफ्त, उड़ाये जा दिल खोल के'ये बात बिल्कुल सटीक बैठती हैं हमारे देश में दी जाने वाली सलाहों के मुफ्तिया सलाहकारों पर. सलाहों का आकार प्रकार मौके के अनुसार बदलता रहता है मगर उड़ाई सदा ही जाती है. इन सलाहों का विशिष्ट चरित्र होता है; यह सलाह बिना मा...
समीर लाल
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भारत में वेलेंटाईन डे का प्रचलन कब से आया यह तो ठीक ठीक पता नहीं. इतना जरुर याद है जब बीस साल पहले भारत छोड़ा था तब तक कम से कम हमारे शहर, जो महानगर तो नहीं था किन्तु फिर भी बड़ा शहर तो था ही, में नहीं आया था. हमारे समय में तो खैर बीबी को भी ’आई लव यू’ बोलने का रिवाज...