ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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धरना! धरना!! धरना!! आजकल जहाँ सुनो, बस यही सुनाई दे रहा है.वैसे तो नित नये नये धरने कभी जंतर मंतर पर, कभी रामलीला मैदान पर, तो कभी राजघाट पर और कोई जगह न मिले तो कलेक्ट्रेट के सामने, होते ही रहते हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, किसान आदि धरने पर बैठ भी जायें तो भी न तो म...
समीर लाल
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पहले के जमाने में एक बार आप महापुरुष घोषित हो लिए तो फिर सर्वमान्य एवं सर्वकालिक महापुरुष होते थे. मरणोपरांत महापुरुष के नाम पर सड़क का नाम रखा जाता था और उनकी मूर्ति चौराहे पर लगा दी जाती थी. हालांकि महापुरुषों की चौराहे पर लगी मूर्ति पर तब कबूतर आकर बैठते और बीट क...
समीर लाल
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तुरुप का पत्ता याने ट्रम्प कार्ड जिसमें किसी भी हाथ को जीतने की क्षमता होती है और सभी कार्डों में सबसे बड़ा माना जाता है.बचपन में जब ताश खेला करते थे और अगर तुरुप का पत्ता हाथ लग जाये, तो क्या कहने. चेहरे पर विश्व विजेता वाले भाव आ जाते थे.शायद इसीलिए इसे ट्रम्प कार...
समीर लाल
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मकर संक्रांति के नाम सुनते ही खिचड़ी की याद आ जाती है. यूँ तो बचपन में जब बीमार पड़ते थे तब भी खिचड़ी ही खाने को मिलती थी. बुरा बीमार होने से ज्यादा इस बात का लगता था कि बाकि के सारे लोग तो घर में पराठा सब्जी और पुलाव दबा रहे हैं और हमको खिचड़ी मिल रही है. अपने दुख से...
समीर लाल
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अगले साल पुस्तक मेले में आने का मन है. उत्साही लेखक विमोचन के लिए आग्रह करेंगे ऐसा मुझे लगता है. ऐसा लगने का कारण अखबार वालों का अब मेरे नाम के साथ ’लेखक कनाडा निवासी वरिष्ट व्यंग्यकार हैं’ लिखना है. नाम के साथ वरिष्ट लगने लगे तो लिखना कम और ज्ञान ज्यादा बांटना चाह...
समीर लाल
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भारत एक उत्सव प्रधान देश है और हम पूरे मनोभाव से हर उत्सव मनाते हैं.लोकतंत्र में चुनाव भी एक उत्सव है. प्रति वर्ष यह उत्सव भी भारत वर्ष में कहीं न कहीं किसी न किसी रुप में लगातार मनाया जाता है, चाहे विश्व विद्यालय के हों या पंचायत या निकाय या विधान सभा या फिर लोक स...
समीर लाल
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ऐसा कहते हैं कि नेता पैदा होते हैं, बनाये नहीं जाते. कहना ऐसा चाहिये था कि नेता के घर नेता पैदा होते हैं, बाकी के सिर्फ जुगाड़ से बन सकते हैं.क्या ये वैसा ही नहीं है जैसे व्यापारी के घर में व्यापारी पैदा होते हैं. अमीर के घर अमीर. वकील के घर अक्सर वकील, किसान के घर...
समीर लाल
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आँख बंद करके लंबी सांस लो, फिर उस व्यक्ति का कृत्य और चेहरा याद करो जिसने तुमको छला है और जिससे बदला लेने की भावना अपने मन में लिये तुम इतने दिनों से जी रहे हो. अब सांस को धीरे धीरे वापस छोड़ते हुए मन ही मन में कहो कि जाओ, मैने तुमको माफ किया. ऐसा बार बार दोहराओ. कु...
समीर लाल
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बचपन में हमसे बीबीसी रेडिओ और अखबार पढ़ने को कहा जाता था खासकर संपादकीय ताकि भाषा का ज्ञान समृद्ध हो. वाकई बड़ी सधी हुई वाणी रेडिओ पर और जबरदस्त संपादकीय और समाचार होते थे अखबारों में. अखबारों में वर्तनी की त्रुटियाँ कभी देखने में न आतीं. कभी किसी शब्द में संशय हो तो...
समीर लाल
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तिवारी जी रिटायरमेन्ट के पहले विभागाध्यक्ष थे एवं उनके विभाग में अनेक कर्मचारी उनके अन्तर्गत काम करते थे. घंसु ने उनसे आज एक मेनेजमेन्ट फंडा पूछा कि यदि आपका कोई कर्मचारी दिन में १८-१८ घंटे कार्य करे. कभी छुट्टी पर न जाये तो आप उसे कैसे पुरुस्कृत करेंगे और क्यूँ?ति...