ब्लॉगसेतु

Ratan Singh Shekhawat
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विक्रम संवत् 1360 के चैत्र शुक्ला तृतीया की रात्रि का चतुर्थ प्रहर लग चुका था । वायुमण्डल शांत था । अन्धकार शनैः शनैः प्रकाश में रूपान्तरित होने लग गया था । बसन्त के पुष्पों की सौरभ भी इसी समय अधिक तीव्र हो उठी थी । यही समय भक्तजनों के लिए भक्ति और योगियों के लिए...
Ratan Singh Shekhawat
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राजस्थान के शेखावाटी आँचल के ठिकाने नवलगढ़ (वर्तमान झुंझनु जिले में) के शासक (सेकुलर गैंग की भाषा में सामंत) ठाकुर नवल सिंह शेखावत (Thakur Nawal Singh Shekhawat : 1742—1780)अपने खिराज (मामले) के साठ हजार रुपयों की बकाया पेटे बाईस हजार रूपये की हुण्डी लेकर दिल्ली जा...
 पोस्ट लेवल : shekhawat History Glorious History Rajasthani Kahaniya
Ratan Singh Shekhawat
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“बारात चल पड़ी है। गाँव समीप आ गया है इसलिए घुड़सवार घोड़ों को दौड़ाने लगे हैं। ऊँट दौड़ कर रथ से आगे निकल गए हैं । गाँव में ढोल और नक्कारे बज रहे हैं -दुल्हा-दुल्हिन एक विमान पर बैठे हैं । दुल्हे के हाथ में दुल्हिन का हाथ है । हाथ का गुदगुदा स्पर्श अत्यन्त ही मधुर...
Ratan Singh Shekhawat
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कीर्ति-स्तम्भ (कुतुबमीनार) के ठीक सामने जहाँ आजकल दर्शकों के विश्राम के लिये हरी दूब की क्यारियाँ बनी हुई हैं, वहाँ आज से लगभग पौन आठ सौ वर्ष पहले तक सुन्दर संगमरमर का छोटा सा मन्दिर बना हुआ था। उस मन्दिर के निर्माण का इतिहास भी बड़ा मनोरंजक और विचित्र है।दिल्ली क...
Ratan Singh Shekhawat
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केवल बीस पच्चीस घुड़सवारों को लेकर महाराणा लाखा ‘‘बूंदी’’ फतह करने को चल पड़े। सूरजपोल से निकल कर उन्होंने बूंदी पर आक्रमण कर दिया। चित्तौड़ दुर्ग की दुन्दुभियों ने विजयराग अलापा। नौबत पर विजयाभियान का डंका पड़ा और नकीबों ने चित्तौड़पति के जयघोष से आकाश गूंजा दिया।“हर-ह...
Mithilesh Singh
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मित्रों के समूह में लीडरशिप पर ज़ोरदार चर्चा चल रही थी. कोई लीडर्स में उद्देश्य के क्लियर होने की बात कर रहा था तो कोई उसकी डायनामिक पर्सनालिटी को लीडरशिप के लिए आवश्यक बता रहा था. इसके अलावा भी समर्थकों का हजूम, पैसे की पॉवर, अच्छा वक्ता, हाजिरजवाब जैसे अ...
Mithilesh Singh
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क्या आम क्या ख़ास, इस प्याज ने कइयों को उलझा रखा है तो कइयों की नाक में दम कर रखा है. प्याज से जुड़ा मेरा अनुभव भी है, जिसे लिखते वक्त मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि इसे साहित्य की कौन सी विधा में शामिल किया जा सकता है. खैर, यह मेरी व्यक्तिगत समस्या है लेकिन उन...
समीर लाल
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सुन कर अजीब सा लग सकता है मगर हर शहर के मुँह में एक जुबान होती है और उस जुबान की अपनी एक अलग ही जुबान होती है. आपका शहर दरअसल वो शहर होता है जो आपके बचपन से जवानी तक के सफर का और अक्सर उसके बाद तक का भी, चश्मदीद गवाह होता है या यूँ कहें कि वो शहर जिस शहर में, आप...
Mithilesh Singh
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कालरा साहब का ग्राफ़िक डिज़ाइन और बैनर प्रिंटिंग का बिजनेस बढ़िया चल रहा था और इसी की बदौलत वह खटारा स्कूटर से होण्डा सिटी तक आ गए थे. इसके लिए न केवल उनकी मेहनत, बल्कि उनका स्टाफ भी सालों तक लगा रहा. राम बहादुर तो उनके पास 25 साल से लगा हुआ था और ऑफिस में झाड़ू लगाने...
Rahul singh
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