ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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गारत हो दिमाग़! कमबख्त डिश कहीं की हो, क्या फ़र्क़ पड़ता है। पर दिमाग़ है कि सबकुछ नोट किये बिना मानता नहीं, बस जीवन की मुफ़लिस-सी आवाज़ में बयान किये तबील ब्यौरे ही दस्तक नहीं दे पाते।सितम के फ़नकार— मृदुला गर्ग (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});...
rishabh shukla
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​ये धड़के मेरा,  यह नाजुक जिया  आया सावन यह आया  ,आया मस्ती भरा ।ओ रे पिया  ,आजा रे पिया , अब तो आ जा ,आया सावन  यह आया  अाया मस्ती भरा  बादल सलोने से  छाने लगे हैं ,छम छम के बूँदे ,बरसनेंलगे हैं ,नगाड़े ये बिजली के...
rishabh shukla
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नमस्कार,स्वागत है आप सभी का यूट्यूब चैनल "मेरे मन की" पर|"मेरे मन की" में हम आपके लिए लाये हैं कवितायेँ , ग़ज़लें, कहानियां और शायरी|आज हम लेकर आये है कवियत्री रेखा जी का भोजपुरी गीत "देशवा बचाके रख भईया"|आप अपनी रचनाओं का यहाँ प्रसारण करा सकते हैं और रचनाओं का आनं...
rishabh shukla
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#meremankeeMere Man Kare "मेरे मन की" पर आपकी रचनाओं के ऑडियो / विडियो प्रसारण के लिए सादर आमंत्रित हैं I निवेदन है कि प्रसारण हेतु ऑडियो / विडियो भेजें I आपकी कवितायेँ, गज़लें , कहानिया , मुक्तक , शायरी , लेख और संस्मरण का प्रसारण करा सकते हैं ISubscribe...
Bharat Tiwari
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साँप वाला बॉक्स उठाया और फिर दौड़ा — शायद बिना ही साँसों के। और अबकी जो गिरा...लिखते जाओ इंदिरा दाँगी...लिखते जाओ. प्रिय लेखक यों ही नहीं बनता; पाठक का प्रिय बन पाने के लिए वह अथाह मशक्कत से रचना कर्म का धर्म निभाता है,  उसका शुक्रिया पाठक उसे 'प्रिय लेखक...
Bharat Tiwari
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“दीदी! क्या सचमुच के डेविल होते हैं..?” बंटी ने सहज बालोचित्त जिज्ञासा से पूछा।” कहानी को दुबारा सुनने के बाद वह सहम गया था। “हाँ! दादी कहती है। टी.वी. में भी दिखाया जाता हैं, मीनस् होते हैं।”"रेपिस्ट"राजेश झरपुरेजेठ की शाम।कॉलोनी में घरों के दरवाज़े खुलते तो बच्चो...
Bharat Tiwari
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प्यार, अभिलाषा, जुनून, ज़मीन, रोमांच, प्रकृति जयश्री रॉय की कहानी 'इक्क ट्का तेरी चाकरी वे माहिया...' इन सब को जोड़ती-तोड़ती और मरोड़ती कहानी है...लेकिन बड़ी बात यह है कि ये सब दर्द के उस साए में होता है जो हमारी परछाई का हिस्सा है. और कहानी की गति अपने युवा कथाकार की...
Bharat Tiwari
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दादी का बागीचा समृद्ध था। केला, पपीता, नींबू और आँवले के पेड़ थे। नींबू खूब फलता। चोरी होने के भय से नींबू काँटों की बाड़ से घिरे थे। भोजन के वक्त जितने पुरुष थे उतना ही फाँक के हिसाब से तोड़कर रसोई में पहुँचाये जाते। दोनों किनारे वाले तीनों पुरुषों को और बीच वाले भाग...
Bharat Tiwari
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मैंने चपरासी से कहकर अपने और उसके लिए चाय मंगवाई। चाय पीने के बहाने वह सामने बैठ गया वर्ना मैं तो उससे लेख लेकर उसे तुरंत विदा करने वाला था। हालांकि मुझसे चाय मंगवाना उसकी रणनीति का हिस्सा था, यह मुझे बाद में पता चला। वह पूरी तैयारी के साथ आया था। —बहुरूपिया,...
Bharat Tiwari
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खस्सी के गोश्त की जगह मुर्गे-मुर्गी बहुत राहत देते थे, लेकिन 'तास' डिश की मुश्किल यह थी कि इसकी 'रेसिपी' में मुर्गे-मुर्गी के गोश्त के लिए कोई जगह नहीं होती थी। यद्यपि ऐसा नहीं था कि इस क़स्बे में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच कोई आपसी बैर-भाव था या उनके बीच तनाव रह...
 पोस्ट लेवल : Anuj कहानी FEATURED Kahani अनुज