ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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केया दास की ज़िन्दगी में घाव ही घाव हैं......चोट ही चोट हैं। वह हर पल अपने शरीर से अलग होते मांस-पिंडों को रिसते लहू में डूबो कर जोड़ने-साटने के प्रयास करती है और बदलती जा रही है एक टेढ़ी-मेढ़ी आकृति में। उसकी ज़िन्दगी के पोर-पोर पर निशान बन गए हैं। कहीं चोट के काले निश...
Bharat Tiwari
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रश्मि नाम्बियार भारत में हिंदी ऑडियो बुक की उभरती दुनिया की पहली कहानीकारों में हैं। अपने 11 साल के कॉर्पोरेट कैरियर के बाद उन्होंने 4 साल पहले रेडियो के लिए लिखना शुरू किया। सरल भाषा में, वो अपनी कहानियों में रिश्तों की बारीकियों को बुनकर, भावनाओं के नए...
Bharat Tiwari
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निर्माल्य— डॉ. सच्चिदानंद जोशीमंच पर जैसे ही कलाकार के नाम की घोषणा हुइ, मै भौचक्का रह गया। कल से जिसे मैं लड़की समझ रहा था, वो लड़का निकला। वह मंच पर अपनी सितार हाथ में लिये आ रहा था और मैं कल के अपने लतिका के साथ हुए उस संभाषण को याद कर रहा था, जब इस संगीत सभा का...
Bharat Tiwari
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मासूम कहानियाँ जिनमें इंसानियत अपने रोज़मर्रा के रूप में नज़र आती रहती है, उन्हें पढ़ना न सिर्फ एक मुस्कान दिए रहता है साथ ही स्फूर्ति भी देता है. इरा टाक शब्दांकन की स्टार कहानीकार हैं, और उनकी कहानियों में यह मासूमियत होती है... भरत तिवारी मैडम का बंटी— इरा टा...
 पोस्ट लेवल : Era Tak कहानी इरा टाक Kahani
Bharat Tiwari
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हद्द बेशरम हो तुम, जब बच्चे छोटे थे तो कभी गोदी में बिठाया तुमने? आज बड़े आये हो पिता का फ़र्ज़ निभाने। अरे कॉलेज जा पहुंचे हैं बच्चे तुम्हारे। उसे याद आया सचमुच कॉलेज में पढ़ने लगे हैं उसके बच्चे। वो उन्हें बड़ा होता देख ही नहीं पाया। वह कौन सा समय था जब वह अपनी बेटी...
Bharat Tiwari
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Photo (c) Krishna Sobtiकृष्णा सोबतीजी की "मार्फ़त दिल्ली" पढ़ रहा हूँ. मैं, साहित्य आदतन तोड़ा धीरे-धीरे ही पढ़ता हूँ. और तब तो ठहर-ही जाता हूँ जब कुछ पढ़े जा रहे से कोई विचलन पैदा हो जाती है. कल रात 'पितृ हत्या' पढ़ते हुए ऐसा ही हुआ. रुक गया  अब कृष्णाजी से बात हो...
rishabh shukla
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नेता जी के आगमन पर शर्मा जी ने प्रसन्नता के भाव चेहरे पर लाते हुए कहा - "अद्भुत संयोग है की नेता जी स्वयं यहाँ पधारे|"चौबे जी पास में खड़े थे उन्होंने कहा - "यह सच में अद्भुत संयोग ही है की नेता जी चुनाव के बाद पधारे| शायद यह इतिहास में पहली बार हो रहा है|"यह चित्र...
Bharat Tiwari
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जावेद मुस्कुराए। “ठीक है। चलो तुम्हें खाना खिलाता हूँ। साथ में जी भर कर तुम मुझे ताने खिला देना। ” मीरा हिचकिचाई। शायद मनु फ़ोन करे। उसे बाल भी धोने हैं, सुबह धोने-सुखाने का समय नहीं मिलता। जावेद तब तक एक छोटे से रेस्तराँ के सामने रुक गए। “ ‘साइज’ पर मत जाओ, ग्यूसि...
 पोस्ट लेवल : कहानी Anukriti FEATURED Kahani अनुकृति
sanjiv verma salil
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 पुरोवाक :कहने-पढ़ने योग्य जीवन प्रसंगों से समृद्ध कांति शुक्ल की कहानियाँ आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' *           आदि मानव ने अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने के लिए कंठजनित ध्वनि का उपयोग सीखने के बाद ध्वनियों को अर्थ दे...
Bharat Tiwari
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फिर उसी अनजान नंबर से संदेश है- 'आपको मेरा नाम कैसे मालूम? आप कवि हैं या ज्योतिषी? कैसे पता चला कि मेरा नाम .... प्रियदर्शन की कथाशैली हमेशा से अच्छी रही है, रोचकता बनाये रखना वह भलीभाँति जानते हैं. किसी सच को गल्प में ऐसा कस के बुन देना कि वह सच लगते हुए भी ग...