ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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कृष्णा सोबती की कहानी आज़ादी शम्मोजान की 'भूरे-भूरे' उसने आवाज़ लगाई। शम्मोजान की सीढ़ियों पर बैठा भूरा किसी नौजवान छोकरे को हाथ के इशारे से शम्मो के शरीर का नाप बतलाते हुए ऊपर आ पहुँचा और बोला, 'हाँ, बाई आज झण्डियाँ लोगी न?'तिरंगों की छाया में शुभ्रवसना नग...
Bharat Tiwari
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सिम्मी हर्षिता की कहानी उनका जाना और मृदुला गर्ग का मर्म ...इससे ज़्यादा,मृत्यु के बाद याद किये जाने के लिए एक लेखक क्या कर सकता है? "तुम्हें तो पसंद हैं न? बस इतना ही काफी होना चाहिए। अपनी पसंद का कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। जीवन को यही पसंद है। तुम तो फूल...
Bharat Tiwari
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रुचि भल्ला की परिकथा में प्रकाशित कहानी,आई डोन्ट हैव ए नेम समय सुबह साढ़े पाँच बजे का है । इस वक्त आसमान का रंग वंशीधर के रंग सा हो आया है। तारों की टिमटिमाती लौ धीमी पड़ती जा रही है ...मुर्गे की बाँग और कड़क। गिन कर दस बार बाँग दे चुका है चाॅर्ली का कलगीदार म...
Bharat Tiwari
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मार्मिक कहानियां: तरुण भटनागर — "तेरह नंबर वाली फायर ब्रिगेड"उसे यह भी नहीं पता था कि स्टीव को पल भर के लिए शराब पीने की इच्छा हुई थी। पब के सामने खड़े-खड़े उसने अपनी पॉकेट से पैसे निकालकर गिने थे। उसे काउण्टर वाले शख़्स पर गुस्सा आया जिसने उससे फ़ोन करने के चार यूरो...
Bharat Tiwari
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कहानी की समीक्षा कैसे करें | तंत्र और आलोचना — रोहिणी अग्रवाल‘तेरह नंबर वाली फायर ब्रिगेड‘रोहिणी अग्रवालमहर्षि दयानंद विश्वविद्यालय,रोहतक, हरियाणामेल: rohini1959@gmail.comमो० : 9416053847कौतूहल और पठनीयता - ये दो ऐसी विशिष्टताएं है जो कथा साहित्य की रीढ़ हैं, लेकिन...
Bharat Tiwari
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उपन्यास कैसे लिखें? ऐसे — पढ़िए: उमा शंकर चौधरी के उपन्यास 'अंधेरा कोना' के अंश ... पता नहीं, लेकिन हो सकता है कि आपने भी कभी मेरी तरह यह सोचा हो कि कोई कथाकार आपका प्रिय लेखक क्यों हो जाता है। उमा शंकर को जितनी दफ़ा पढ़ता हूँ बस यही लगता रहता है उससे अधिक सच किसी और...
Bharat Tiwari
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हंस नवम्बर' 18 में प्रकाशित शालिगराम की नतबहू — मलय जैन,ऊंचाई ठीक-ठाक, रंग कन्हैया को मात देता और बचपन में निकली बड़ी माता से चेहरा छप्पन टिकलियों का कोलाज़, मगर वधू चाहिए एकदम भक्क गोरी, छरहरी लावण्य मयी कंचन काया । सर्वगुण संपन्न। जैसे लम्बरदार फुरसत में पड़े पड़े...
sanjiv verma salil
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कहानी कहानी की १ संजीव *मनुष्य ने बोलना सीखने के साथ अपने जीवनानुभवों को एक-दूसरे से कहना आरंभ किया तो कहानी विधा का जन्म हुआ। सामान्यत: किसी घटना, अनुभव या प्रतिक्रिया को आपस में कहा-सुना गया। इसीलिये पुरातन साहित्य में कहानी को वार्ता कहा गया, जैसे...
Bharat Tiwari
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...कभी-कभी होश में रहना कितना कठिन लगता है! जी चाहता है हमेशा के लिए नहीं तो कुछ देर के लिए मर जाय! मोर्ग के ठंडे ड्राअर में कोई रख दे कफन में लपेट कर। भट्टी-से सुलगते माथे को जरा ठंडक मिले, सांस ना लेनी पड़े कुछ दिन... डिप्रेशन, इस शब्द से इतना भय है कि इसे ब...
rishabh shukla
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#Struggle and #Victory हरिया ने अपनी बेटी को उठाते हुए कहा - "उठ बेटी! सूरज सर पर चढ़ आया है| अभी खेत में बहूत सारा काम बाकी है, और अभी एक-दो घंटे में तो धरती भी तपने लगेगी|"हरिया के बेटी पूनम ने सिर्फ करवट बदली और कहा - "बाबू! थोड़ी देर और सोने दो न.." और फिर स...