ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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#meremankee #hindi #book #poetry #story #onlinegatha #rishabhshukla"अरे ओ राधे! अभी उठा की नहीं?" - पुष्पा जी कर्कश स्वर में बोली|राधे दौड़ता हुआ आया| एक १२ वर्षीय लड़का जोर-जोर से हाफते हुआ चला आ रहा था|"जी माताजी|" सांसो को रोकते हुए बोला| "कहाँ था त...
Bharat Tiwari
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दूर से नीले रंग की बस ऐसे चली आ रही थी जैसे अगर एक्सीलेटर से पैर हटा तो चालान कट जाएगा। सड़क पर खड़े लोग तितर-बितर हो गए। बस ने चीखते हुए ब्रेक लगाया और बस की हालत देख कर इंतजार में खड़े लोग सकते में आ गए। अंदर सवारियों और बकरियों में अंतर करना मुश्किल था। बाहर लोग...
Bharat Tiwari
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“अरे मेहरा जी, दस साल से मैं रीडर हूँ । अभी तक प्रोफेसर नहीं बना । पन्द्रह साल सहायक प्रवक्ता रहा हूँ और यह सुनिधि बारह वर्षों में ही रीडर बन जाना चाहती है ? हमने उसे पढ़ाया और आज वह हमारी बराबरी में आकर बैठ जाना चाहती है ?”“तो थोड़ा परेशान कीजिए न डॉक्टर साहब ।”हम...
Bharat Tiwari
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वंदना राग के यहाँ  हिंदी कहानियों को साहित्य मिलता है, साहित्य की अनिवार्य ज़रुरत: वर्तमान देखती, समझती दृष्टि मिलती है। 'हिजरत के पहले' को जब आप स्त्रीलेखन से परे उठकर पढ़ना सीख लेंगे तब-ही समझ पाएंगे। उठो और हिजरत रोको।जन्मदिन मुबारक वंदना राग!भरत तिवारीदादा...
Tejas Poonia
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आवाज : ओम पुरी निर्देशक-लेखक-पटकथा: हैरी बावेज&#2...
Bharat Tiwari
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भिखारी और वितृष्णा के भाव का अजीब साथ होता है। चोली -दामन का साथ। कभी -कभी दया का कोई उड़ता हुआ छींटा उन पर गिर जाता है किन्तु अक्सर...रिया शर्मा गलीज  ज़िंदगी"कमबख्त इस साल सरदी जान लेकर ही जाएगी।" ठण्ड के अहसास से अपनी गुदड़ी में लिपटा शिवा कुनमुनाया। उसक...
Bharat Tiwari
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छोटी कहानी में 'बड़े' मानवीय रिश्तों और मूल्यों को आधुनिक-आवश्यक-सामाजिक बदलावों की महत्ता दिखाते हुए कह पाना और साथ में कहानीपन का बने रहना, 'बड़ी' बात है! कहानीकार डॉ सच्चिदानंद जोशीजी को हार्दिक बधाई — भरत तिवारी (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).p...
Bharat Tiwari
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‘‘अम्मा भूख लगी है !’’‘‘अभी तो खाई थी रोटी घण्टा भर पहले !’’दीपा चुप है किसी गुनहगार की तरह; लेकिन उसकी रिरियाती दृष्टि में भूख़ साक्षात् है। रुक्मिणी सख़्त चिढ़ती है इस नज़र से।गुड़ की डली— इंदिरा दाँगीमर्म को समझने के लिए दिल का कोमल होना आवश्यक है। कहानी लिखने के लिए...
Bharat Tiwari
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इंडिया टुडे साहित्य वार्षिकी  में प्रकाशित आंकाक्षा पारे की कहानी नीम हकीमरक्कू भैया का कहा ब्रहृम वाक्य। ऐसे कैसे टाल दें। तीन दिन खद्दर कपड़े से नाक पोंछ-पोंछ कर भले ही बंदर के पिछवाड़े की तरह हो जाए लेकिन मजाल क्या कि तीन दिन से पहले कोई सीतोपलादि का क...
Bharat Tiwari
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प्रदूषण वाली स्टोरी हर जगह कई बार छप चुकी है। कई संस्थानों से इस पर छोटे—बड़े धुरंधरों ने शोध के लिए रकम भी ऐंठी है। पर हुआ कुछ नहीं। प्रदूषण का मसला अब सबके लिए बेकार है। शहर सो गया था— योगिता यादव (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); एक सन...