ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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कहानी कहानी की १ संजीव *मनुष्य ने बोलना सीखने के साथ अपने जीवनानुभवों को एक-दूसरे से कहना आरंभ किया तो कहानी विधा का जन्म हुआ। सामान्यत: किसी घटना, अनुभव या प्रतिक्रिया को आपस में कहा-सुना गया। इसीलिये पुरातन साहित्य में कहानी को वार्ता कहा गया, जैसे...
Bharat Tiwari
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...कभी-कभी होश में रहना कितना कठिन लगता है! जी चाहता है हमेशा के लिए नहीं तो कुछ देर के लिए मर जाय! मोर्ग के ठंडे ड्राअर में कोई रख दे कफन में लपेट कर। भट्टी-से सुलगते माथे को जरा ठंडक मिले, सांस ना लेनी पड़े कुछ दिन... डिप्रेशन, इस शब्द से इतना भय है कि इसे ब...
rishabh shukla
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#Struggle and #Victory हरिया ने अपनी बेटी को उठाते हुए कहा - "उठ बेटी! सूरज सर पर चढ़ आया है| अभी खेत में बहूत सारा काम बाकी है, और अभी एक-दो घंटे में तो धरती भी तपने लगेगी|"हरिया के बेटी पूनम ने सिर्फ करवट बदली और कहा - "बाबू! थोड़ी देर और सोने दो न.." और फिर स...
Bharat Tiwari
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आँखों के आगे छाते अंधेरे से बाहर निकलने के लिए, फ़र्श पर पड़ी पुरानी, अधजली बीड़ी को फिर से जला लिया, पर पहला कश खींचते ही खांसी का ऐसा धसका उठा कि लगा दम लेकर ही थमेगा। खाँसते-खाँसते आँखें लाल हो गईं, उसमें उनका पूरा प्रदेश, उसमें दूर-दूर तक फैले जंगल, धू-धू करके जल...
sanjiv verma salil
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कहानी-छोटी सी भूल स्व. सुशील दास *[स्व. सुशील दास म. प्र. लोक निर्माण विभाग में अभियंता तथा म. प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के कर्मठ पदाधिकारी थे। वे आजीवन अविवाहित रहे, समर्पित देवी भक्त तथा अपनी माता श्री की हर आज्ञा का पालन करनेवाले पुत्र थे। स्व. दास कुशल...
 पोस्ट लेवल : सुशील दास कहानी kahani sushil das
Bharat Tiwari
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कहानी की कोमलता को लेखक भूल तो जाता है लेकिन वह यह नहीं जानता कि यह कोमल-तत्व घर की दाल के ऊपर तैरते जीरे की माफ़िक होता है...जो बाहर की दाल में नहीं दिखता, और जो बनावटी (या गार्निश का हिस्सा) कतई हो भी नहीं सकता. इंदिरा दांगी ने कहानी के कोमलपन को इतनी जतन से सम्हा...
rishabh shukla
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#Mobileखाने की मेज सज चुकी थी लेकिन घर के किसी सदस्य का कोई पता न था, तभी प्रेम नाथ जी अपनी छड़ी लिए हुए कमरे से बाहर निकले और खाने की मेज के पास बैठ गए, और राम को सभी सदस्यों को बुलाने के लिए कहा| राम उनका नौकर लेकिन प्रेम नाथ जी के काफी करीब था|थोड़ी देर बाद प्रेम...
Bharat Tiwari
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प्रत्यक्षा का लेखन पढ़ते मैं हमेशा हतप्रभ होता हूँ. अव्वल तो इन्सान को ऐसे विचार, जो प्रत्यक्षा की कहानियों में नज़र आते हैं, आने की दैविक स्वाभाविक क्षमता प्राप्त होनी चाहिए और उसके बाद इन विचारों को तक़रीबन मूल रूप में -- अपने दिमाग की खलबली को जैसा लिखित रूप प्रत्य...
Bharat Tiwari
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हिंदी साहित्य में 'नई कहानी' को गढ़ने वाली त्रयी के महान कथाकार राजेन्द्र यादव की कहानी,गुलाम... रंगे स्यार को राज तो मिल गया, लेकिन समस्या यह आयी कि अब शासन कैसे चलाया जाये । जंगल में शेर-चीते, भालू-भेड़िये सभी थे और सब पर अपना हुक्म चलाना आसान नहीं था। उनमें स...
Bharat Tiwari
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इस वहशी हिंसक समय ने भक्ति के किसी भी रूप को उसके मूल सुन्दर सच्चेपन से नहीं दूर किया हो, ऐसा लगता नहीं. देशभक्ति भाई सामान मित्र को हटा गयी, निकट पड़ोसी को दुश्मन बता गयी...जाने तो क्या क्या परिभाषाएं गढ़ दी जा रही हैं. कहानीकार  मधु कांकरिया साहित्य की बड़...