ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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बस 2 मिनट बोलो :: असग़र वजाहतबस 2 मिनट बोलो2 मिनट में अपना सारा दुख सुख अपनी व्यथा अपना दर्दअपना भूत और अपना भविष्यकह डालो2 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगाक्योंकि तुम्हारी कहानी बहुत छोटी हैजिसकी गर्दन पर खूनी पंजा गड़ा हो वह 2 मिनट से ज्यादा क्या बात करे...
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : zia-ur-rehman-jafri bal-sahitya kavita
Hari Mohan Gupta
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 प्रिय,      बसन्त त्योहार, भेजता तुमको पाती,     लहराती गेहूँ की बालें,     फूले सरसों के ये खेत, ,मुझको आज याद हो आती।     इन्हें देख हर्षित होता मन,     ये प...
 पोस्ट लेवल : Kavita Path
sanjiv verma salil
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एक रचना पुरुष *तुम्हें न देखूँ तो शिकायत किया करता हूँ अदेखापुरुष हूँ न..तुम्हें देखूँतो शिकायतदेखता हूँपुरुष हूँ न..काश तुम लोआँख मुझसे फेरमुझको कर अदेखाजी सकूँ मैं चैन सेपुरुष हूँ न.***salil.sanjiv@gmail.com#दिव्यनर्मदा#हिंदी_ब्लॉगरhttp://divy...
 पोस्ट लेवल : purush kavita कविता पुरुष
sanjiv verma salil
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हास्य रचनाबतलायेगा कौन?संजीव*मैं जाता था ट्रेन में, लड़ा मुसाफिर एक.पिटकर मैंने तुरत दी, धमकी रखा विवेक।।मुझको मारा भाई को, नहीं लगाना हाथ।पल में रख दे फोड़कर, हाथ पैर सर माथ ।।भाई पिटा तो दोस्त का, उच्चारा था नाम।दोस्त और फिर पुत्र को, मारा उसने थाम।।रहा न कोई तो...
 पोस्ट लेवल : hasya kavita हास्य रचना
Bharat Tiwari
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भगोड़े स्वर्ग में छिपे हुए हैंऔर हम उन्हें नर्क में खोजरहे हैं...स्वप्निल श्रीवास्तव, कविता में आज...कविताओं में भाषा के रोल से अधिक शब्दों का  रोल होता है. आपने वह क़व्वाली सुनी होगी:  "नज़र ऊँची की तो दुआ बन गई  नज़र नीची की तो हया बन गई&nbsp...
sanjiv verma salil
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व्यंग्य रचना:अभिनंदन लो *युग-कवयित्री! अभिनंदन लो....*सब जग अपना, कुछ न परायाशुभ सिद्धांत तुम्हें यह भाया.गैर नहीं कुछ भी है जग में-'विश्व एक' अपना सरमाया.जहाँ मिले झट झपट वहीं सेअपने माथे यश-चंदन लोयुग-कवयित्री अभिनंदन लो....*मेरा-तेर...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य कविता vyangya kavita
sanjiv verma salil
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एक कविता:सीखते संज्ञा रहे...संजीव 'सलिल'*सीखते संज्ञा रहे हम.बन गये हैं सर्वनाम.क्रिया कैसी?क्या विशेषण?कहाँ है कर्ता अनाम?कर न पायेसाधना हमवंदना ना प्रार्थना.किरण आशा की लियेकरते रहे शब्द-अर्चना.साथ सुषमा को लियेपुष्पा रहे रचना कमल.प्रेरणा देती रहेंनित भावनाएँ नित...
 पोस्ट लेवल : कविता kavita
Bharat Tiwari
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आलोकधन्वा की कविताओं का सार, संसार कवि को न पढ़े गए से पढ़ें! —  सुधा सिंह आलोकधन्वा सन् सत्तर के दशक के महत्वपूर्ण कवि हैं। 'ब्रूनो की बेटियाँ' , 'भागी हुई लड़कियाँ', 'गोली दागो पोस्टर', 'जनता का आदमी' आदि कविताएं कवि की प्रतिनिधि कविताएं मानी...
यूसुफ  किरमानी
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मुस्तजाब की कविताएं हिंदीवाणी पर आप लोग पहले भी पढ़ चुके हैं...पेश है उनकी नवीनतम कवितासब धुंधला नजर आ रहा है ..........................................सब धुंधला नजर आ रहा हैसच, झूठ, तारीख, तथ्यकिसे मानें, रह गया है क्या सत्यसलाखें बन गए हैं मस्तिष्क हमारेअंदर ही घ...