ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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क्या हुआ ग़र जुदा हो गए, क्या हुआ जो तुम बेवफ़ा हो गएlमुझे एक पल तो याद करती हो ना, की हम खामखा हो गएlथोड़ी याद ताजा करने,कभी मिलों तो सहीlक्या हुआ जो तुम हो गए किसी और के, क्या हुआ जो खो गए भीड़ मेंlमिलने को जी तो मचलता होगा ना, या फिर...
 पोस्ट लेवल : emotion kabhi milo to sahi Hindi Kavita Manch blog Love
Bharat Tiwari
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आसमान खुला तो नहीं था उस वक्त भीलेकिन बचपन की यादों में शायद धुआं नहीं होतापंकज राग की कवितापटना: ‘ढूंढ़ोगे अगर मुल्कों मुल्कों’राजेंद्र नगर के उस छोटे से पहले माले के फ्लैट के सामनेएक पतली सी सड़क थीजिसके उस पार कुछ झाड़ झंखारों के बीचएक पोखर था जिसमें सुबह सुबह कमल...
Hari Mohan Gupta
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 दीपावली की शुभ कामनायें बना कर देह का दीपक,जलाओ स्नेह की बाती,मिटे मन का अँधेरा भी,प्रकाशित हो  धरा सारी|      दिवाली रोज  मन जाये,     बढ़े धन धान्य जीवन में,     प्रभुल्लित आप  रह पाय...
 पोस्ट लेवल : Kavita
Bharat Tiwari
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बाकी बहुत ज़्यादा बातें तो मैं जानती नहीं,पर जो समझ पाती हूं वो और हैऔर जो समझाई जाती हूं वो और है...अंडा-करी और आस्थादामिनी यादव की कविताआज वर्जित वार है,मैंने दिन में अंडा-करी खाई थीऔर शाम को दिल चाहा,इसलिए अपने घर के मंदिर में,बिना दोबारा नहाए ही जोत भी जलाई थी,...
Bharat Tiwari
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...जगह दो थोड़ी सी   इस वक्त़ की हबड़ातबड़ी में   इस दुनियादारी के जंजाल में...निधीश त्यागी की भाषा में एक बेहतरीनपन है,जो ऐसा है कि हिंदी साहित्य में नए अनुभवों को तलाशने वालों को पसंद आने की पूरी ताकत रखता है. उनके गध्य का प्रशंशक रहा हूँ,&nbs...
Hari Mohan Gupta
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एक प्रश्न जाग्रत था मन में,मानव क्या जिन्दा रहता,मर कर भी इस जग में ?रुक जाती है साँस, हृदय स्पन्दन रुकता,लेकिन कुछ के वाणी के स्वर,गूँज रहे रग रग में।मेरा कुछ ऐसा विचार है,मानव के ही कर्म ओर गुण जिन्दा रहते,मिट्टी की यह देह मरे, मर जाये तो क्या?जग के सम्मुख, वाणी...
 पोस्ट लेवल : Kavita Path
Vikram Pratap Singh Sachan
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सुबह सवेरे उगता सूरजजग में उजियारा लाता है पौधों को भी भोजन देता जीवन-चक्र चलाता है।रंग-बिरंगे फूल हो हर्षितभौरा भी गाना गाता है रफ्ता-रफ्ता छटा&...
 पोस्ट लेवल : kavitayen bal kavita
Vikram Pratap Singh Sachan
103
फटी जींस में घूम रहा है हनी सिंह पे झूम रहा है भारत का नव युवा है फ़ैशन की हद चूम रहा है ।सर पे छत्ता मधुमक्खी सामुँह में&nbs...
 पोस्ट लेवल : kavitayen
Vikram Pratap Singh Sachan
103
नोयडा की हवाई इन्सानी बस्तियाँघर मानो हवा में तैरती कश्तियाँआस-पास कंक्रीट का जंगलबची खुची जमीन पर गाड़ियों का दंगलबाकी सब कुशल मंगलसीमेंट की बीमों पर पक्षियों के घौसलेहवा में तड़पते तन्हा बच्चो के हौसलेहवा में फिजा में चहूँ ओर चोंचलेऊँचाईयो का दस्तूर,फिजूल के फितू...
 पोस्ट लेवल : Noida Authority Kavita kavitayen NOIDA Traffic NOIDA
अभिषेक ठाकुर
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वो ख़ुशामदी की आब-ओ-हवा बताते रहेसनक को भी बादशाह की अदा बताते रहेअंतिम तिनके के भी हाथ से छूटने तलकवो ख़ुद को हमारा ना-ख़ुदा बताते रहेवो जानते थे हमारे जुनून-ए-इश्क़ की इंतेहापर आँखों में आखें डाल बेवफ़ा बताते रहे वो लफ़्ज़ों का हमारे गला रेतने के बाद पलकों की हलचल...
 पोस्ट लेवल : Kavita Ghazal