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sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव. ग्रंथि श्रेष्ठता की पाले हैं .कुटें-पिटें पर बुद्धिमान हैंलुटे सदा फिर भी महान हैंखाली हाथ नहीं संसाधनमतभेदों का सर वितान हैदो-दो हाथ करें आपस मेंजाने क्या गड़बड़झाले हैं?.बातें बड़ी-बड़ी करते हैंमनमानी का पथ वरते हैंबना तोड़ते संविधान खुददोष...
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दोहे*सकल सृष्टि कायस्थ है, सबसे करिए प्रेम कंकर में शंकर बसे, करते सबकी क्षेम*चित्र गुप्त है शौर्य का, चित्रगुप्त-वरदान काया स्थित अंश ही, होता जीव सुजान*महिमा की महिमा अमित, श्री वास्तव में खूब वर्मा संरक्षण करे,  रहे वीरता डूब*मित्र...
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नागाओं / नागों का रहस्य -2 : पुराण में नागाओं का उल्लेख*भारत के शासन-प्रशासन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले, निर्गुण ब्रम्ह चित्रगुप्त के उपासक कायस्थ अपने आदि पुरुष कि अवधारणा-कथा में उनके दो विवाह नाग कन्या तथा देव कन्या से तथा उनके १२ पुत्रों के विवाह...
 पोस्ट लेवल : नागा naag kayastha naga कायस्थ नाग
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कायस्थों के कुलनाम उपनाम कुलनाम और उपनाम- कायस्थों के कई उपनाम या कुलनाम उनके कार्य से जुड़े रहे हैं. यह भी उनमें से एक है. जिनसे कानून संबंधी सलाह ली जाती थी वे कानूनगो, जिनसे राय महत्वपूर्ण मसलों पर जरूरी समझी जाती थी वे रायजादा, जिन्हें जागीरें बख्श दी गयी थ...
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लेख :नागको नमन : संजीव *नागपंचमी आयी और गयी... वन विभागकर्मियों और पुलिसवालोंने वन्य जीव रक्षाके नामपर सपेरों को पकड़ा, आजीविका कमानेसे वंचित किया और वसूले बिना तो छोड़ा नहीं होगा। उनकी चांदी हो गयी.पारम्परिक पेशेसे वंचित किये गए ये सपेरे अब आजीविका कहाँसे...
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विचारोत्तेजक लेख:कायस्थों का महापर्व नागपंचमीसंजीव*कायस्थोंके उद्भव की पौराणिक कथाके अनुसार उनके मूल पुरुष श्री चित्रगुप्तके २ विवाह सूर्य ऋषिकी कन्या नंदिनी और नागराजकी कन्या इरावती हुए थे। सूर्य ऋषि हिमालय की तराईके निवासी और आर्य ब्राम्हण थे जबकि नागराज अनार्य औ...
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महिमा की महिमा अमित, श्री वास्तव में खूब वर्मा संरक्षण करे, रहे वीरता डूब *चित्र गुप्त है शौर्य का, चित्रगुप्त-वरदान काया स्थित अंश ही, होता जीव सुजान *सकल सृष्टि कायस्थ है, सबसे करिए प्रेम कंकर में शंकर बसे, करते सबकी क्षेम *उग्र न होते प्रभु कभी, रहते सदा प्रशां...
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'चित्रगुप्त ' और 'कायस्थ' क्या हैं ?विजय राज बली माथुरविजय माथुर पुत्र स्वर्गीय ताज राजबली माथुर,मूल रूप से दरियाबाद (बाराबंकी) के रहनेवाले हैं.१९६१ तक लखनऊ में थे . पिता जी के ट्रांसफर के कारण बरेली,शाहजहांपुर,सिलीगुड़ी,शाहजहांपुर,मेरठ,आगरा ( १९७८  में अपना म...
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चित्रगुप्त महिमा - *चित्र-चित्र में गुप्त जो, उसको विनत प्रणाम।वह कण-कण में रम रहा, तृण-तृण उसका धाम ।विधि-हरि-हर उसने रचे, देकर शक्ति अनंत।वह अनादि-ओंकार है, ध्याते उसको संत।कल-कल,छन-छन में वही, बसता अनहद नाद।कोई न उसके पूर्व है, कोई न उसके बाद।वही रमा गुंजार में,...
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विचारोत्तेजक लेख: कायस्थों का महापर्व नागपंचमी संजीव *कायस्थोंके उद्भव की पौराणिक कथाके अनुसार उनके मूल पुरुष श्री चित्रगुप्तके २ विवाह सूर्य ऋषिकी कन्या नंदिनी और नागराजकी कन्या इरावती हुए थे। सूर्य ऋषि हिमालय की तराईके निवासी और आर्य ब्राम्हण थे जबकि नागराज अनार्...