ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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लप्रेक – है क्या यह? पढ़िए मुकेश कुमार सिन्हा की तीन लघु प्रेम कहानियाँउम्मीद शायद सतरंगी या लाल फ्रॉक के साथ, वैसे रंग के ही फीते से गुंथी लड़की की मुस्कुराहटों को देख कर मर मिटना या इंद्रधनुषी खुशियों की थी, जो स्मृतियों में एकदम से कुलबुलाई।मॉनसूनमेघों को भी...
Sujit Shah
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__.✍ विन्देश्वर ठाकुर जनकपुर धाम (नेपाल)हाल : दोहा, क़तर - भुली गै ! आइ कोन दिन छै ?- आँए रौ, बुझिक' एना अनठबैछे किए ? सोम नै छै आइ ?- गै भकलोलही से नै पुछलियौग ! भेलेन्टाइन सप्ताहके कोन दिन छै ? से कहलियौग।- अच्छा बौवा से बात ! आब बुझलियौ तोहर भीतरी...
मुकेश कुमार
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एक बड़े सरकारी अस्पताल का किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट, दो अलग शहर से भिन्न सम्प्रदाय का लड़का-लड़की, जवानी के खुशियों भरे दिन व सपने देखने के बजाय दर्द से बेहाल, थे भर्ती किडनी के ट्रांसप्लांट के लिए!अलग-अलग बेड पर लेटे कराहते हुए एक दूसरे को छिपी नजरों से निहार कर दर्द...
मुकेश कुमार
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संसद मार्ग एटीएम के सामने पंक्तिबद्ध लड़का जो करीब 300 लोगो के बाद खड़ा था, और उसके बाद फिर करीबन 200 लोग खड़े थे ! बेसब्री से बैंक के दरवाजे खुलने का सबों को इन्तजार था ! कोई गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी वाले चाय बाँट रहे थे, सभी लाइन में खड़े पकते लोगो के लिए !! :oतभी उन...
मुकेश कुमार
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लघु प्रेम कथा-----------लड़का : कभी-कभी इन मुरझाये पौधों और कम चमकते फूलों को देखकर तुम्हे ये बेशक ख़याल नहीं आता होगा कि इनके लिए भी कभी न कभी तुम्हे मसाले वाले पनीर या बटर चिकन या लस्सी बनाना चाहिए तुम्हे :)लेकिन, ......तुम्हारे छिपे नजरों से कई बार चिकन के टुकड़े य...
मुकेश कुमार
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माचिस की तीली सररर्र !!एक हलकी सी सांस ली अन्दर और बस सुलग गयी, होंठों से लगी, क्लासिक माइल्ड किंग साइज़ !!जीरो वाट के जलते बल्ब को देखते हुए लड़के ने सांस छोड़ी तो धुएं को बल्ब की और रास्ता बनाते देखा!!आड़ी तिरछी आकृतियाँ उभरी, कुछ काले मेघ जैसी , तो कुछ अनाम प्रिय या...
मुकेश कुमार
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दिनेश पारिख के हाथों मे हमिंग बर्डकक्षा - 9, सेक्शन - बी, छठी घंटी !बायोलोजी के क्लास में रेड स्केच से मैथ्स वाली सोच के साथ उलटी खोपड़ी के तरह डेस्क पर उसने दूर सामने बैठी लम्बे बालों वाली गौरवर्ण नकचढ़ी को देखकर अपने और सिरा रखते हुए पुरे प्यार से नम्बर तीन लि...
 पोस्ट लेवल : laprek लघुप्रेमकथा
मुकेश कुमार
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सुनो !मुझे तुमसे प्यार है, लव यू, लव यू, लव यू !!धत्त यार!! प्यार व्यार कुछ नहीं ! ओनली फ्रेंडशिप समझे न बुद्धू !!क्यों? अरे, हद है न!!  मेरा दिल तुम्हे चाहने लगा है, मेरी क्या गलती !!न न ! ! माँ ने कॉलेज पढने भेजा है, प्यार करने नहीं !! चुप रहो तुम !!चलो छोडो...
 पोस्ट लेवल : लघुप्रेमकथा laprek
prabhat ranjan
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इस बार विश्व पुस्तक मेले की शुरुआत वेलेन्टाइन डे के दिन हो रही है और हिंदी के दो बड़े प्रकाशकों में इश्क को लेकर ‘ब्रांड वार’ की शुरुआत हो गई है. पहली किताब है राजकमल प्रकाशन के नए इंप्रिंट ‘सार्थक’ से प्रकाशित ‘इश्क में शहर होना’, जिसके लेखक हैं जाने माने पत्रकार र...