ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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Neeraj Jaat
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मज़ा आ गया। किताब का नाम देखने से ऐसा लग रहा है, जैसे कश्मीर का ज़िक्र हो। आप कवर पेज पलटोगे, लिखा मिलेगा - यात्रा-वृत्तांत। लेकिन अभी तक मुझे यही लग रहा था कि कश्मीर का यात्रा-वृत्तांत ही होगा। लेकिन जैसे ही ‘पुस्तक के बारे में’ पढ़ा, तो मज़ा आ गया। इसमें तो झारखंड़ के...
मनीष कुमार
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मेघालय में बिताए हमारे आख़िरी दिन की शुरुआत तो लैटलम कैनयम की भुलभुलैया से हुई थी। पर वहाँ से लौटने के बाद हमारा इरादा वहाँ के बेहद प्रसिद्ध संग्रहालय डॉन वास्को म्यूजियम को देखने का था। ऐसा सुना था कि ये संग्रहालय उत्तर पूर्वी राज्यों की संस्कृति को जानने समझने की...
मनीष कुमार
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मावलीनांग से शिलांग लौटने के बाद हमारे पास एक दिन और बचा था। मैंने शिलांग आने के पहले  इंटरनेट पर लैटलम कैनयन के बारे में पढ़ा था। वहाँ की खूबसूरत वादियों का जिक्र तो था ही, साथ ही ये हिदायत भी थी कि भीड़ भाड़ से दूर इस सुनसान इलाके में पहुँचना टेढ़ी खीर है इसलिए रास्त...
मनीष कुमार
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जब पहले पहल मैंने मेघालय जाने का कार्यक्रम बनाया था तो मावलीनांग के बारे में मैं जानता भी नहीं था। कोलकाता में अपने एक रिश्तेदार के यहाँ जब मेघालय जाने की चर्चा चली तो वहाँ इस गाँव और इसकी विशेषता के बारे में पता चला।   जिस देश में स्वच्छता अभियान चलाने के लिए सरका...
आदित्य सिन्हा
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WangalaWangala or Hundred Drum Festival (also known as Hundred Drums, Wanna, Wanna Rongchuwa) is a harvest festivalcelebrated by the Garo tribes, of Meghalaya & Assam in North East India and Greater Mymensingh in Bangladesh. They express their gratitude to the...
मनीष कुमार
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चेरापूंजी में नोहकालिकाई के आलावा जिस झरने का लोग सबसे ज्यादा जिक्र करते हैं वो है सेवेन सिस्टर्स फॉल यानि सात बहनों का झरना। अब सातो बहनें सगी ठहरीं। सो जब अपनी प्रचंडता से बहती हैं तो एक दूसरे में आत्मसात होकर लगभग एक धारा बना देती हैं। पर जब ऐसा होता है तो धुंध...
मनीष कुमार
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इस श्रंखला के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि किस तरह रास्ते की हरियाली का स्वाद लेते हुए हम चेरापूंजी पहुँचे। चेरापूंजी मेघालय का एक छोटा सा कस्बा है जिसे हम सभी बारिश की अधिकता के लिए जानते हैं। चेरापूंजी में देखने लायक बहुत कुछ है हर जगह फैली प्राकृतिक सुंदरता, ढेर सा...
मनीष कुमार
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शिलांग प्रवास के दूसरे दिन हमने चेरापूंजी की राह पकड़ी । अब यूँ तो चेरापूँजी बारिश के लिए जाना जाता है पर उस दिन आसमान लगभग साफ था। काले बादलों का  दूर दूर तक कोई नामो निशान नहीं था। शिलांग से चेरापूंजी की दूरी साठ किमी की है, जिसे रुकते रुकते भी आराम  से...
मनीष कुमार
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मेरी मेघालय यात्रा की पहली कड़ी में आपने देखा आसमान से दिखते शिलांग के आस पास के हरे भरे इलाकों को। रात को पूजा की गहमागहमी के बाद जब अगली सुबह उठे तो मौसम बिल्कुल साफ था। रात को ही पता चला था कि वहाँ के किसी स्थानीय समूह ने मेघालय बंद का आह्वान किया है। गाड़ीवाला जि...