१७६१... पानीपत में भयानक नरसंहार चल रहा था, विश्वासराव के मारे जाने से युद्ध का स्वरुप ही बदल गया था.. मराठे हार रहे थे... युद्ध की परिस्थितियों को देख कर एक ३०-३१ साल का नौजवान घायल हालत में अपनी बची सेना और प्रतिशोध कि अग्नी के साथ अपने राज्य की तरफ निकल पडा...उस...