ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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रास्ते जीवन की डगर पर मुश्किलें कई है,बस है चलते जानाlइसने तो निकलने का,कोई तो रास्ता होगाllयदि कोई मुँह मोड़ ले,इस मुश्किल घड़ी मे ना घबरानाlकोई मिले तुमसे अगर, कोई तो वास्ता होगाllमेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/घुमन्तू - https://th...
मुकेश कुमार
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हो बेहद खूबसूरतइतना ही तो कहा थाकि बोल उठीलजाती भोर सीहल्की गुलाबी स्नेहिल प्रकाश के साथरंग बिखेरती हुई- ब्यूटी लाइज इन द आइज ऑफ द बीहोल्डरतत्क्षणआंखों की पुतलियों संगछमकते प्रदीप्त काली चकमक संगमरमर सीकोर्निया और रेटिना के मध्यलहरा उठा सारा संसारकहाँ तक निहारूं ?ह...
Rajeev Upadhyay
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दोस्ती दुश्मनी का क्या? कारोबार है ये। कभी सुबह कभी शाम तलबगार है ये॥ कि रिसालों से टपकती है ये कि कहानियों में बहती है ये। कभी सितमगर है ये और मददगार भी है ये॥इनके होने से आपको जीने की वजह मिलती और इस तरह चेहरे के...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Bharat Tiwari
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बस 2 मिनट बोलो :: असग़र वजाहतबस 2 मिनट बोलो2 मिनट में अपना सारा दुख सुख अपनी व्यथा अपना दर्दअपना भूत और अपना भविष्यकह डालो2 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगाक्योंकि तुम्हारी कहानी बहुत छोटी हैजिसकी गर्दन पर खूनी पंजा गड़ा हो वह 2 मिनट से ज्यादा क्या बात करे...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लकोई पत्ता हरा-सा ढूंढ लियातेरे घर का पता-सा ढूंढ लियाजब भी रफ़्तार में ख़ुद को खोयाथोड़ा रुकके, ज़रा-सा ढूंढ लियाउसमें दिन-रात उड़ता रहता हूंजो ख़्याल आसमां-सा ढूंढ लियाशहर में आके हमको ऐसा लगादश्त का रास्ता-सा ढूंढ लियातेरी आंखों में ख़ुदको खोया मगरशख़्स इक लापता-सा...
Rajeev Upadhyay
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कभी हम सौदा-ए-बाज़ार हुए कभी हम आदमी बीमार हुए और जो रहा बाकी बचा-खुचा उसके कई तलबगार हुए॥ सितम भी यहाँ ढाए जाते हैं रहनुमाई की तरह पैर काबे में है और जिन्दगी कसाई की तरह॥अजब कशमकश है दोनों जानिब मेरे एक आसमान की बुलंदी क...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
मुकेश कुमार
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ब्लॉगर ऑफ द इयर के उपविजेता का अवार्ड तुम्हारी अनुपस्थिति मेंहै न,सावन-भादोबादलबारिशबूँदें !पर,हर जगहचमकती-खनकतीतस्वीरसिर्फ तुम्हारी !पारदर्शी हो गयी हो क्या?याअपवर्तन के बादपरावर्तित किरणों के समूह सीढ़ल जाती होतुम !!बूँद और तुमदोनों मेंशायद है नप्रिज्मीय गुण...
Rajeev Upadhyay
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ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस जाते हैं। पर जगह कहां वो ये सवाल ही अभी उठा नहीं की आदमी...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
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तूफान कोई आकर क्षण में चला जाता है पर लग जाते हैं बरसों हमें समेटने में खुद को संभला ही नहीं कि बारिश कोईजाती है घर ढहाकर।ये सिलसिला हर रोज का हैऔर कहानी में समय की लकीर कोखींचकर बढाते हैंघटाते हैंकि होने का मेरे मतलबआकर कोई रोज कह जाता है।-----...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
sanjiv verma salil
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Poem:Sanjiv*Success and un success Are two faces of a coin. Every un success leads toSuccess in lifeIf you do'nt lose heart.Success gives more pleasureAfter un success.Spoon feeded successWithout any struggle orTesting your abilityDoesn't serve any purpos...