ब्लॉगसेतु

Roli Dixit
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उस रोज़ पूछा था किसी ने हमसेतुम्हारा नाम क्या हैहमने ये कहकर उन्हेंमुस्कराने की वजह दे दीकि एक दूसरे का नाम न लेना ही तोहमारा प्रेम है...कितने बावले हैं लोगकि वो तुम्हें कहीं भी ढूंढ़ते हैंमेंडलीफ की आवर्त सारणी में,न्यूटन के नियम में,पाइथागोरस की प्रमेय में,डार्वि...
Sanjay  Grover
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ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी ल...
मुकेश कुमार
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ह्म्म्म!!कड़क झक्क सफ़ेदटंच बुशर्ट !! फीलिंग गुड !!चुटकी भर रिवाइव पावडरकुछ बूँद टिनोपाल व नील कीडलवा दी थी न !कल पहन कर जब निकला थाथा प्रसन्नचितथा पहना तने चमकते कॉलर के साथधुली सफ़ेद कमीज !!दिन पूरा गुजरागरम ईर्ष्या व जलन भरा दिनदर्द से लिपटी धूल के साथआलोचनाओं की क...
Sanjay  Grover
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बह गया मैं भावनाओं में कोई ऐसा मिलाफिर महक आई हवाओं में कोई ऐसा मिलाहमको बीमारी भली लगने लगी, ऐसा भी थादर्द मीठा-सा दवाओं में कोई ऐसा मिलाखो गए थे मेरे जो वो सारे सुर वापस मिलेएक सुर उसकी सदाओं में कोई ऐसा मिलापाके खोना खोके पाना खेल जैसा हो गयालुत्फ़ जीने की स...
VMWTeam Bharat
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ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है कलम लिखने को बहुत बेक़रार है क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार हैप्रकृति ने खुद किया तुम्हारा शृंगार है उनकी चाहत भी बेशुमार है मैसेज के साथ साथ...
मुकेश कुमार
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एक घंटे तैतीस मिनटलम्बे मोबाइल कॉल के बादघूमते सांय-सांय करते पंखे के नीचेसिहरता हुआ, बंद आँखों के साथमहसूस रहा था प्रेम स्पंदित तेज धडकनों कोक्योंकिप्रेमसिक्त वो ख़ास बोलदूसरी तरफ से कहा जा चुका थाअंततः !रूम मेट ने पूछा, झिड़कते हुएक्या हुआ बे ?आखिर, अचंभित व स...
Sanjay  Grover
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Photo by Sanjay Groverचांद से चिट्ठी आई है के दुनिया आनी-जानी है मंदिर-मस्ज़िद यहीं बना लो, मंज़र बड़ा रुहानी हैगांधीजी का नाम रटो हो, पहने हो जैकेट और कोटलंगोटी के नाम पे फिर क्यूं मरी तुम्हारी नानी हैआधी-पौनी दिखे सचाई,समझा ख़ुदको ज्ञानी हैअंधे कैसे होते होंगे...
Roli Dixit
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Devendra Gehlod
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सामने कारनामे जो आने लगे,आईना लोग मुझको दिखाने लगे |जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे, अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे |फ़ैसला लौट जाने का तुम छोड़ दो, फूल आँगन के आँसू बहाने लगे |फिर शबे हिज़्र आँसूं मेरी आँख के, मुझको मेरी कहानी सुनाने लगे |आईने से भी रहते है वो दूर अब,ज...
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Devendra Gehlod
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जहन में वो तो ख्वाब जैसा है,वो बदन भी गुलाब जैसा है |बंद आँखों से पढ़ भी सकता हूँ,तेरा चेहरा किताब जैसा है |मेरी पलके झुकी है सजदे में,दिल भी गंगा के आब जैसा है |हर घड़ी ज़िक्र तेरा करता हूँ,ये नशा भी शराब जैसा है | - अर्पित शर्मा "अर्पित"परिचयअर्पित शर्मा जी अर्पित उ...
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