ब्लॉगसेतु

दिनेशराय द्विवेदी
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17 मार्च तक अदालत में कामकाज सामान्य था। 18 को जब अदालत गया तो हाईकोर्ट का हुकम आ चुका था, केवल अर्जेंट काम होंगे। अदालत परिसर को सेनीटाइज करने और हर अदालत में सेनीटाइजर और हाथ धोने को साबुन का इन्तजाम करने को कहा गया था, वो नदारद था। काम न होने से हम मध्यान्ह की च...
दिनेशराय द्विवेदी
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तरह-तरह के दिवस मनाना भी अब एक रवायत हो चली है। हमारे सामने एक दिन का नामकरण करके डाल दिया जाता है और हम उसे मनाने लगते हैं। दिन निकल जाता है। कुछ दिन बाद कोई अन्य दिन, कोई दूसरा नाम लेकर हमारे सामने धकेल दिया जाता है। कल सारी दुनिया स्त्री-दिवस मना रही थी। इसी महि...
दिनेशराय द्विवेदी
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न्याय की स्थिति बहुत बुरी है। विशेष रुप से मजदूर वर्ग के लिए। आज मेरी कार्यसूची में दो मुकदमे अंतिम बहस के लिए थे। इन दोनों मामलों में प्रार्थी मजदूर हैं, जिनके मुकदमे 2008 से अदालत में लंबित हैं। हालाँकि श्रम न्यायालय में जाने के पहले इन मजदूरों ने श्रम विभाग में...
PRAVEEN GUPTA
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Rajasthan state is located in the northwestern part of India and the name means as the ‘land of the kings.’ It is one of the popular travelers’ destinations that fall under Delhi and Taj Mahal tourist circuit. Medieval oligarchs built spectacular palaces and lavish...
 पोस्ट लेवल : Born for Business: The Marwari People
अपर्णा त्रिपाठी
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सुना था बहुत बडे आदमी थे तुमफिर क्यों फर्क पढ गया तुम्हेगर मुझ जैसे छोटे से व्यक्ति नेनही किया सलाम तुम्हे झुक करक्यों रात भेज अपने चार आदमीबुलवा कर अपनी कोठीझुका कर अपने पैरोंतुम्हे बताना पडातुम वाकई में हो बहुत बडे आदमी*********************शहर में शोर हैधूमध...
 पोस्ट लेवल : people life
Sanjay  Grover
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लघुव्यंग्यभीड़-भरी बस में चढ़ते हुए लोग- ‘पहले चढ़ने दो भई, जानते नहीं चढ़ना कितना ज़रुरी है !?’भीड़-भरी बस से उतरते हुए लोग- ‘पहले उतरने दो भई, हम उतरेंगे नही तो आप चढ़ोगे कैसे !?’-संजय ग्रोवर22-07-2017
Sanjay  Grover
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बच्चों की भलाई के लिए काम करनेवाली एक संस्था से आज एक फ़ोन आया। काफ़ी नाम वाली संस्था है। एक भली लड़की बच्चों की किसी योजना का विवरण देने लगी। बच्चों के लिए आर्थिक मदद मांगनेवाले फ़ोन कई बार आते हैं। मैंने भली लड़की से कहा कि मैं आपको बीच में टोक रहा हूं पर आपको बता दूं...
rambilas garg
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                   लोकतन्त्र कोई तकनीकी अवधारणा नही है। और न ही ये कोई किसी भी तरह, यानि येन केन प्रकारेण प्राप्त किये गए बहुमत का नाम है। पिछले दो दिन में जो कुछ गोवा और मणिप...
Sanjay  Grover
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लघुकथावह हमारे घरों, दुकानों, दिलों और दिमाग़ों में छुपी बैठी थी और हम उसे जंतर-मंतर और रामलीला ग्राउंड में ढूंढ रहे थे।-संजय ग्रोवर05-02-2017
Sanjay  Grover
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लघुव्यंग्यअपने यहां लोग अकसर अपने बारे में कुछ बातें बहुत अच्छे से जानते हैं। जैसे मैं देखता हूं कि कई लोग दूसरों से तो कहते ही हैं-‘बिज़ी रहो-बिज़ी रहो’, ख़ुद भी अकसर बिज़ी रहने की कोशिश करते पाए/पकड़े जाते हैं। वे कभी ख़ाली हों तो झट से टीवी चला देते हैं, एफ़एम सुनने...