ब्लॉगसेतु

निरंजन  वेलणकर
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लदाख़ से निकलते समय इस यात्रा सी जुड़ी बहुत सी यादें मन में ताजा हो रही हैं| मात्र पन्द्रह दिन की होने के बावजूद इस यात्रा ने बहुत कुछ दिया| बहुत कुछ देखने को मिला| लोगों से मिलना हुआ| स्वयं से भी कुछ हद तक मिलना हुआ| निकलने से वापसी की यात्रा तक लगातार ऐसे अनुभव आते...
निरंजन  वेलणकर
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७ जून| अच्छी नींद से ऊर्जा वापस तो आ रही है, लेकिन अभी भी थकान है| पड़ोस के लोग बता रहे है कि बहुत से पर्यटक विपरित मौसम के कारण लेह छोडकर वापस जा रहे हैं| आगे की यात्रा के बारे में अभी भी सभी विकल्प खुले हुए हैं| नीरज जाट जी बहुत प्रोत्साहन दे रहे हैं; उन्होने फोन...
निरंजन  वेलणकर
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निरंजन  वेलणकर
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५ जून की सुबह भी सर्द है| इस बार लदाख़ का अलग ही मौसम देखने का अवसर मिला है| आज का दिन इस साईकिल यात्रा का अहम पड़ाव है| देखा जाए तो लेह में दो से तीन तक ही रूकने का पहले विचार था| पहले जो योजना बनायी थी, वह करगिल- लेह करने के बाद मनाली की ओर जाने की थी|‌ चूँकि अभी भ...
निरंजन  वेलणकर
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निरंजन  वेलणकर
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सिन्धू नदी की गूँज के साथ १ जून की सुबह हुई| लदाख़ी घर! एक थर्मास जैसे बर्तन में चाय मिली| सुबह अच्छी खासी ठण्ड है| घर के प्रमुख ने कुछ देर रूकने के लिए कहा|‌ यहाँ से लेह लगभग ८४ किलोमीटर है|‌ इसलिए जल्दी निकलना होगा| साईकिल को पानी से थोड़ा धोया| साईकिल ठीक है| ल...
निरंजन  वेलणकर
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निरंजन  वेलणकर
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निरंजन  वेलणकर
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लदाख़! भारत का वह रमणीय क्षेत्र! वस्तुत: वह एक जगह या पर्यटन स्थल न हो कर एक अद्भुत दुनिया है! लदाख़ वह दुनिया है जिसमें बर्फाच्छादित पर्वत, नदियाँ, झरने, जंगल, दंग कर देनेवाली झीलें, रेगिस्तान यह सब है! मानो लदाख़ एक युनिव्हर्स है जिसमें ये सभी चीजें साथ देखी जा सकती...
Rahul singh
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