ब्लॉगसेतु

निरंजन  वेलणकर
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राहत कार्य में सहभाग का मध्यान्तर: अनन्तनाग और पहलगाम२०१० में कुपवाड़ा के फर्जी मूठभेड़ मामले में ५ सेना के व्यक्तियों को उम्र कैद घोषित होने का समाचार मिलने के पश्चात् अनुभव की अगली कड़ी लिख रहा हुँ. . . १२ अक्तूबर के सुबह ठण्ड काफी बढ़ चुकी है| हालांकि श्रीनगर में बर...
निरंजन  वेलणकर
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P { margin-bottom: 0.21cm; direction: ltr; color: rgb(0, 0, 0); widows: 2; orphans: 2; }P.western { font-family: "Times New Roman",serif; font-size: 12pt; }P.cjk { font-family: "SimSun","宋体"; font-size: 12pt; }P.ctl { font-family: "Times New Roman",serif; font-size...
निरंजन  वेलणकर
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राहत कार्य के धुरन्धर १० अक्तूबर की सुबह| आज पाम्पलेट और रिपोर्ट का काम पूरा होगा| अब पेज का डिजाईन करनेवाले व्यक्ति को वह सौंप दिया जाएगा| इच्छा हो रही है कि फिल्ड का कुछ काम किया जाए| बस आज की बात है| कल श्रीनगर जाना है|‌ सुबह विदुषी दिदी को छोडने के दादाजी और अन...
निरंजन  वेलणकर
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आपदा के विभिन्न पहलू९ अक्तूबर का दिन| कल रात हुई बातचीत अब भी ताजा है| दादाजी ने कल की मीटिंग में यह भी कहा था कि आज सुबह एक जगह जाना है| जम्मू से  दस किलोमीटर दूर एक कोलोनी है| वहाँ संस्था के बीस स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं| सुबह पहला काम वहाँ जा कर वहाँ का...
Kajal Kumar
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मेरे पड़ोसी का बेटा बचपन से ही बड़ा आदमी बनने के ख़्वाब देखा करता था. उसकी चाह पूरी होती भी दि‍खने लगी जब पढ़ाई-लि‍खाई में उसकी कोई रूचि‍ न रही, लेकि‍न बातों का पहलवान नि‍कला. और आख़ि‍र वो एक दि‍न भी आ ही गया जब ‘सीधे बारहवीं करें’ टाइप एक कॉलेज से उसके लि‍ए ...
MediaLink Ravinder
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Mon, Oct 7, 2013 at 5:30 PMश्रम विभाग पर रोषपूर्ण प्रदर्शन:चौथे दिन भी नहीं हुआ कोई फैसलालुधियाना:07 अक्टूबर 2013: (*विश्वनाथ//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): हाथों में लाल झंडा और बंद मुठियों की बाँहों में जोश भरा उत्साह। सब कदम से कदम मिला कर चल रहे थे जंग...
 पोस्ट लेवल : Ludhiana Protest March Comrade Peoples Strike
Paliakara Suibramanian
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पुराणों में वर्णित सरस्वती नदी एक वास्तविकता थी यह बात विगत कुछ वर्षों में हुए पुरा  अन्वेषणों से स्थापित हो चुका  है. तो बात उसी समय की है जब सरस्वती घाटी सभ्यता पर ग्रहण लग रहा था। लगातार सूखा पड़ने लगा और खेती किसानी ठप्प हो गयी.  खाने को अन्न के लाले पड़ने लगे....
 पोस्ट लेवल : Architecture Goa Heritage Mythology People Social Temple Travel
दिनेशराय द्विवेदी
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 देश में कुछ लोग हैं जो खुद को कानून से अपने आप को ऊपर समझते हैं। उन में ज्यादातर तो कारपोरेट्स हैं, वे समझते हैं कि देश उन के चलाए चलता है। वे जैसा चाहें वैसा कानून बनवाने की ताकत रखते हैं। राजनेताओं का एक हिस्सा सोचता है देश उन के चलाए चलता है। जनता ने उन्हे...
Paliakara Suibramanian
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कुछ आवासीय परिसरों में ठेले में घरेलू आवश्यकताओं की वस्तुयें विक्रय हेतु आती रहती हैं. बहुत सारी गृहणियां अपने दैनिक उपयोग हेतु सब्जी भाजी आदि खरीदती ही हैं भले दाम कुछ अधिक हो. बाज़ार जाने से तो बचे. कुछ परिसर ऐसे भी हैं जहाँ ठेले वालों को छुट्टी के दिन भी फटकने न...
 पोस्ट लेवल : Chennai People Social
Kajal Kumar
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P { margin-bottom: 0.08in; direction: ltr; color: rgb(0, 0, 0); widows: 2; orphans: 2; }A:link { color: rgb(0, 0, 255); } एक जंगल था, स्‍याह जंगल. जंगल में एक हाथ को दूसरा हाथ दि‍खाई नहीं देता था. उस जंगल में एक सि‍यार था और एक था गधा. गधा सि‍यार से कहीं अधि‍क बड़...