ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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बस 2 मिनट बोलो :: असग़र वजाहतबस 2 मिनट बोलो2 मिनट में अपना सारा दुख सुख अपनी व्यथा अपना दर्दअपना भूत और अपना भविष्यकह डालो2 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगाक्योंकि तुम्हारी कहानी बहुत छोटी हैजिसकी गर्दन पर खूनी पंजा गड़ा हो वह 2 मिनट से ज्यादा क्या बात करे...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लकोई पत्ता हरा-सा ढूंढ लियातेरे घर का पता-सा ढूंढ लियाजब भी रफ़्तार में ख़ुद को खोयाथोड़ा रुकके, ज़रा-सा ढूंढ लियाउसमें दिन-रात उड़ता रहता हूंजो ख़्याल आसमां-सा ढूंढ लियाशहर में आके हमको ऐसा लगादश्त का रास्ता-सा ढूंढ लियातेरी आंखों में ख़ुदको खोया मगरशख़्स इक लापता-सा...
Rajeev Upadhyay
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कभी हम सौदा-ए-बाज़ार हुए कभी हम आदमी बीमार हुए और जो रहा बाकी बचा-खुचा उसके कई तलबगार हुए॥ सितम भी यहाँ ढाए जाते हैं रहनुमाई की तरह पैर काबे में है और जिन्दगी कसाई की तरह॥अजब कशमकश है दोनों जानिब मेरे एक आसमान की बुलंदी क...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
मुकेश कुमार
201
ब्लॉगर ऑफ द इयर के उपविजेता का अवार्ड तुम्हारी अनुपस्थिति मेंहै न,सावन-भादोबादलबारिशबूँदें !पर,हर जगहचमकती-खनकतीतस्वीरसिर्फ तुम्हारी !पारदर्शी हो गयी हो क्या?याअपवर्तन के बादपरावर्तित किरणों के समूह सीढ़ल जाती होतुम !!बूँद और तुमदोनों मेंशायद है नप्रिज्मीय गुण...
Rajeev Upadhyay
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ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस जाते हैं। पर जगह कहां वो ये सवाल ही अभी उठा नहीं की आदमी...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
372
तूफान कोई आकर क्षण में चला जाता है पर लग जाते हैं बरसों हमें समेटने में खुद को संभला ही नहीं कि बारिश कोईजाती है घर ढहाकर।ये सिलसिला हर रोज का हैऔर कहानी में समय की लकीर कोखींचकर बढाते हैंघटाते हैंकि होने का मेरे मतलबआकर कोई रोज कह जाता है।-----...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
sanjiv verma salil
5
Poem:Sanjiv*Success and un success Are two faces of a coin. Every un success leads toSuccess in lifeIf you do'nt lose heart.Success gives more pleasureAfter un success.Spoon feeded successWithout any struggle orTesting your abilityDoesn't serve any purpos...
Rajeev Upadhyay
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कुछ चेहरेबस चेहरे नहीं होतेसूर्ख शर्तें होती हैं हमारे होने की। कुछ बातेंबस बातें नहीं होतींवजह होती हैं हमारे होने की। और बेवजह भी बहुत कुछ होता हैजिनसे जुड़ी होती हैंहमारी साँसें होने की।तो क्या कर इन्हें मैं याद करूँकि जीते रहें ये यूँ करकि रहे खबर मुझे...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
Rajeev Upadhyay
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समय की ही कहानी कह रहे हैं सभीपशु, आदमी या हो फिर कोई चींटी।हेर-फेर है किरदारों में बसकि आइने की अराइश सेबह रही हैं स्वर लहरियाँ कईजो होकर गुजरती हैं कानों से सभी।समय की ही कहानी कह रहे हैं सभी॥उन स्वरों से धुन कई हैं निकलतींजो कहानी बनकर हैं पिघलतींऔर इस तरह हर आँ...
 पोस्ट लेवल : Hindi Poem Literature
मुकेश कुमार
201
'एक्वारजिया' या करूँ उसका अनुवाद तो अम्लराज ! या शाही जल !अम्लरानी क्यों नहीं ?ज़िन्दगी की झील मेंबुदबुदाते गम और उसका प्रतिफल जैसे सांद्र नाइट्रिक अम्ल और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का ताजा मिश्रण एक अनुपात तीन का सम्मिश्रण उफ़ ! धधकता बलबलाता हुआ सब कुछ कहीं स्वयं न पिघल...