ब्लॉगसेतु

Kailash Sharma
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चारों ओर पसरा है सन्नाटामौन है श्वासों का शोर भी,उघाड़ कर चाहता फेंक देनाचीख कर चादर मौन की,लेकिन अंतस का सूनापनखींच कर फिर से ओढ़ लेता चादर सन्नाटे की।पास आने से झिझकतासागर की लहरों का शोर,मौन होकर गुज़र जाता दरवाज़े से दबे क़दमों से भीड़ का कोलाहल, अनकहे...
Bharat Tiwari
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बस 2 मिनट बोलो :: असग़र वजाहतबस 2 मिनट बोलो2 मिनट में अपना सारा दुख सुख अपनी व्यथा अपना दर्दअपना भूत और अपना भविष्यकह डालो2 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगाक्योंकि तुम्हारी कहानी बहुत छोटी हैजिसकी गर्दन पर खूनी पंजा गड़ा हो वह 2 मिनट से ज्यादा क्या बात करे...
Pooja Sharma Rao
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Image: Personal click कितनी अँधेरी रातों के बाद कितने अकेले सफ़र तमाम परिंदे ने कहीं फ़िर आसरे की उम्मीद कर ली थी घर ने कहा तू लौट जा कोई और अब रहता है यहाँ बाकि है तन्हा सफ़र तेरा ! लौटा है सफ़र में अकेला परिंदा फ़कीर रूह न किसी की न कहीं इसका बसेरा...
 पोस्ट लेवल : Poetry
Sanjay  Grover
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ग़ज़लकोई पत्ता हरा-सा ढूंढ लियातेरे घर का पता-सा ढूंढ लियाजब भी रफ़्तार में ख़ुद को खोयाथोड़ा रुकके, ज़रा-सा ढूंढ लियाउसमें दिन-रात उड़ता रहता हूंजो ख़्याल आसमां-सा ढूंढ लियाशहर में आके हमको ऐसा लगादश्त का रास्ता-सा ढूंढ लियातेरी आंखों में ख़ुदको खोया मगरशख़्स इक लापता-सा...
Kailash Sharma
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बन न पाया पुल शब्दों का,भ्रमित नौका अहसासों कीमौन के समंदर में,खड़े है आज भी अज़नबी से अपने अपने किनारे पर।****अनछुआ स्पर्शअनुत्तरित प्रश्नअनकहे शब्दअनसुना मौन क्यों घेरे रहतेअहसासों को और माँगते एक जवाब हर पल तन्हाई में।****रात भर सिलते रहे दर्द की चादर,उधेड़ गया फिर...
Pooja Sharma Rao
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एक डाह है रूह में जैसे तेरी उपेक्षा का जलता कोयला छू गया हो जले हुए घाव सुना सालों तक उतारते हैं एक काले लम्हे की पपड़ी और निशान रह जाता है फिर भी इस जिस्म के सुप्त ज्वालामुखी में मेरी रूह का ग्लेशियर पिघलने लगा है बूंदों के वाष्प बनने से...
 पोस्ट लेवल : Poetry
MediaLink Ravinder
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शिक्षा के क्षेत्र में फिर ज़ोर पकड़ रहा है कविता का जादू  लुधियाना: 20 जुलाई, 2019:(कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::  हर तरफ भागदौड़ का माहौल। कैरियर की जंग, ज़िंदगी की जंग, अपनों से जंग, बेगानों से जंग....इस बेहद संवेदनशील मोड़ पर एक माहौल पैदा हो र...
 पोस्ट लेवल : Jain School Ludhiana Email News Poetry
Kailash Sharma
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तुम संबल हो, तुम आशा हो,तुम जीवन की परिभाषा हो।शब्दों का कुछ अर्थ न होता,उन से जुड़ के तुम भाषा हो।जब भी गहन अँधेरा छाता,जुगनू बन देती आशा हो।जीवन मंजूषा की कुंजी,करती तुम दूर निराशा हो।नाम न हो चाहे रिश्ते का,मेरी जीवन अभिलाषा हो।...©कैलाश शर्मा
Kailash Sharma
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कुछ घटता है, कुछ बढ़ता है,जीवन ऐसे ही चलता है।इक जैसा ज़ब रहता हर दिन,नीरस कितना सब रहता है।मन के अंदर है जब झांका,तेरा ही चहरा दिखता है।चलते चलते बहुत थका हूँ,कांटों का ज़ंगल दिखता है।आंसू से न प्यास बुझे है,आगे भी मरुधर दिखता है।...©कैलाश शर्मा
Kailash Sharma
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गीला कर गयाआँगन फिर से,सह न पायाबोझ अश्क़ों का,बरस गया।****बहुत भारी हैबोझ अनकहे शब्दों का,ख्वाहिशों की लाश की तरह।****एक लफ्ज़जो खो गया था,मिला आजतेरे जाने के बाद।****रोज जाता हूँ उस मोड़ पर जहां हम बिछुड़े थे कभी अपने अपने मौन के साथ,लेकिन रोज टूट जाता स्वप्नथामने से...