ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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Ram Janm Bhumi Ayodhyaराम लला अब आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे|ज़न मानस मन भायेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे||मंदिर वहीं बनाएंगे... तुम हो करुणा सागर, मर्यादापुरुषोत्तम सब के प्रिय, तेरी अमिट छवि है हर हृदय मे, बाट जोहती सबकी आँखे, अब मेरे...
rishabh shukla
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Har Ghar Me Vibhishana Baitha Haiअब बड़ी मुश्किल है लड़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है|मुश्किल है अब चढ़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है||तुम सेंध लगाए बैठे थे,किसी दूसरे के घर पर,कोई तुम्हारा घर ही लूट गया,हर घर में विभीषण बैठा है||तुम हो वीर, शक्तिशाली,रण तुमसे घबराता है|फि...
rishabh shukla
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Aloneना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|मैं अकेला हूँ...ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई हमदर्द नहीं है|मैं अकेला हूँ....कोई कैसे इतना,उलझ जाता है जिंदगी में,की भूल जाता है,कि कोई...
rishabh shukla
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Journeyक्या तुम मुझसे मिल कर, यूँ ही खो जाते हो|वैसे ही सपनों के समंदर मे, गोते खाते हो||इस जीवन पथ पर.... जैसे मैं घुल जाती हूँ, तेरे यादो, जज्बातों मे|जैसे कई लोग मेरे कानो मे,सुन्दर गीत गाते हैं||इस जीवन पथ पर..... क्या तुम भी रोते हो,&n...
rishabh shukla
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कि प्यार नहींग़र प्यार का इजहार ना हो, तो वो प्यार नहीं|क्या हुआ जो तुमको, मुझ पर ऐतबार नहीं||एक बार ऐतबार तो करो, पूरी शिद्दत से|फिर कह ना पाओगे, कि प्यार नहीं||तुमने ना किया भरोसा, हम पर|लेकिन तेरी बेवफाई से, मुझे कोई ऐतराज नहीं||मेर...
kuldeep thakur
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
भावना  तिवारी
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
rishabh shukla
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मेरा हमेशा से एक ही सपना रहा है कि विश्व की प्रत्येक जगह जो देखी जा सके मै देख सकूं | सभी शहरों की भीड़ और गाँवो की शांती को महसूस करूं | नदियों की कलकल और पहाड़ो के सौंदर्य का आनंद उठाऊँ | विश्व की सभ्यता को देखूं, बोली और भाषा को समझने की कोशिस करूं| विश्व में हो र...
rishabh shukla
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मेरा हमेशा से एक ही सपना रहा है कि विश्व की प्रत्येक जगह जो देखी जा सके मै देख सकूं | सभी शहरों की भीड़ और गाँवो की शांती को महसूस करूं | नदियों की कलकल और पहाड़ो के सौंदर्य का आनंद उठाऊँ | विश्व की सभ्यता को देखूं, बोली और भाषा को समझने की कोशिस करूं| विश्व में हो र...