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Bharat Tiwari
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रुचि भल्ला की परिकथा में प्रकाशित कहानी,आई डोन्ट हैव ए नेम समय सुबह साढ़े पाँच बजे का है । इस वक्त आसमान का रंग वंशीधर के रंग सा हो आया है। तारों की टिमटिमाती लौ धीमी पड़ती जा रही है ...मुर्गे की बाँग और कड़क। गिन कर दस बार बाँग दे चुका है चाॅर्ली का कलगीदार म...
Bharat Tiwari
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प्रेम का ज़ख़्म तो वैसे भी सदा गहराता है...हरा रहता है ताउम्र...जैसे रहता है नीम के दरख्त पर झूमते पत्तों का रंग दूर देस की पाती - 1— रुचि भल्लाचैत मास की यह सुबह...आकाश आज निखरा-निखरा सा दिख रहा है...कल शाम की बूँदा-बाँदी ने सूरज के चेहरे को झिलमिलाते आइने सा चमका...
Bharat Tiwari
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रुचि भल्लारचना का जीवंत होना ज़रूरी है. रचनाकार उसे जन्म देता है और उसे ही यह देखना होता है कि उसकी कृति, कवि की कविता, लोगों से दूर नहीं भागे, लोगों को दूर न भगाए. रुचि भल्ला ने अपनी कविताओं का लालनपालन बहुत ध्यान से किया है, उनकी कवितायेँ मन मोह गयीं. आप भी देखिये...