ब्लॉगसेतु

Harash Mahajan
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... मुकम्मिल हो न हो दिल प्यार में तो खूब तड़पता है, सकूं से कहता अश्कों से चले आइये चले आइये | हर्ष महाजन
 पोस्ट लेवल : Azaad Shayari
Harash Mahajan
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... कभी तो दिल की महफ़िल में सलाम-ए-इश्क फरमाइए, हमें ईजाद करना है कलाम-ए-इश्क चले आइये | ___________हर्ष महाजन
 पोस्ट लेवल : Azaad Shayari
Harash Mahajan
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... काश दिल में तेरे उल्फत के ज़खीरे होते, तुम यकीनन मेरे....हाथों में लकीरें होते | ___________हर्ष महाजन
 पोस्ट लेवल : Azaad Shayari
Ram Sumer
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Hindi Love Shayari, Hindi Shayari SMS, Hindi Funny Shayari, Hindi Shayari on LifeBeet Gaye Sare Mahine Saal Ke,Ab Phir Laut Aya Hain December,Mere Gamo ka Mausam Jata Nahi,Ya Allah Kuch Mujh Par Karam Kar,Jab bhi uski yaad ati hain Mujhko,Nahi So Pata Hun Ek Karwat...
 पोस्ट लेवल : Hindi Shayari
Harash Mahajan
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...मुझे फिर बदहवास न करना तुम  ख्वाबों में आकर,बा-मुश्किल चिराग-ए-दिल अपना शांत किया है मैंने  | ________________________हर्ष महाजन
 पोस्ट लेवल : Azaad Shayari
Harash Mahajan
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... ऐ खुदा मुझे तुम अपनी अदाओं में रखना, थक चुका हूँ ज़िन्दगी से दुआओं में रखना | ___________हर्ष महाजन
 पोस्ट लेवल : Azaad Shayari
विनय प्रजापति
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प्रकाश यादव "निर्भीक" | Prakash Yadav Nirbheek अक्सर ख़यालों में आना आपका अच्छा लगता हैकुछ देर ही सही पर साथ आपका अच्छा लगता हैवो बातें वो मुलाकातें जो रह गई अधूरी अब तलकख्वाबों में ही गुफ़्तगू कर आपसे वो सच्चा लगता हैज़िंदगी के रफ़्तार में मशगूल हो गए हम इस कदरजीवन क...
विनय प्रजापति
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आबिद रिज़्वी अबरत | Abid Rizvi Abaratवो लड़की याद आती है [x3]वो जो ख्वाबोंं मेंं बसती थी मेरे दिल में उतरती थी वो जो मेरी हंसी मेंं अपनी मुस्कुराहट घोल देती थी जो मैंं दिल मेंं रखता था ज़ुबाँ से बोल देती थी वो जो मुझको हंसाती थी की उसको अ‍च्छा लगता था मेरा दिल खोल के...
विनय प्रजापति
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फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzadशाम की फ़िक्र में सहर से गयाफिर न लौटा कोई जो घर से गया जिसने देखा भी आसमान की तरफ़आज बस वो ही बाल-ओ-पर से गयाग़म में तल्ख़ी, न आग ज़ख़्मों मेंज़ायक़ा शे'र के हुनर से गया कट ही जाता है दिन भी शब की तरहजब से इक ख़ाब चश्म-ए-तर से गयामालगजी धुँध, रास...
विनय प्रजापति
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फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzad हर साँस में हरचंद महकता हुआ तू है धड़कन का बदन हिज्र के काँटों से लहू हैदिल, गिरती हुई बर्फ़ में, ढलता हुआ सूरज जिस सिम्त भी उठती है नज़र, आलम-ए-हू हैशायद के अभी आस कोई क़त्ल हुई हैरक़्साँ मेरे सीने में किसी ख़ूँ की बू है हर टीस के माथे पे...