ब्लॉगसेतु

डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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 शयोक! तुम्हें पढ़ा जाना अभी शेष है...कहते हैं, पहाड़ी नदियाँ बड़ी शोख़ होती हैं, चंचल होती हैं। लहराना, बल खा-खाकर चलना ऐसा,  कि ‘आधी दुनिया’ को भी इन्हीं से यह हुनर सीखना पड़े। पहाड़ी नदियाँ तो बेशक ऐसी ही होती हैं, मगर कभी हिमानियों से अपना रूप और आकार...
संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : chhattisgarh Tourism Koraba
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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बुंदेलखंड से सूरीनाम तक की यात्रा-कथा(एक गिरमिटिया की गौरवगाथा)अगर यह पता चले, कि रामलीला देखने का शौक भी किसी के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है, और रामलीला देखने के लिए जाना ही किसी व्यक्ति के जीवन में ऐसी ‘रामलीला’ का रूप ले सकता है, कि चौदह वर्षों के बजाय जीवन-भर...
Navin Joshi
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-31 दिसंबर को सैलानियों की आवक के लिए भी आश्वस्त नहीं, माल रोड पर लाइटिंग-संगीत का प्रबंध भी नहीं -प्रशासन के धारा 144 संबंधी आदेश को बता रहे मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार नवीन समाचार, नैनीताल, 27 दिसंबर 2019। सरोवरनगरी में इन दिनों खिली चटख धूप के लिए सैलानियों क...
 पोस्ट लेवल : Nainital Tourism
S.M. MAsoom
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जौनपुर एक ऐतिहासिक शहर है जिसकी जड़ें बहुत गहरी है जिसका तुग़लक़ के बाद का इतिहास तो लोगों ने याद रखा लेकिन पहले का इतिहास भुला दिया लेकिन यहां  समाज  पे उसका असर आज भी देखा जा सकता है |शोध बताते हैं की  इस जौनपुर में इक्षवाकु वश की जड़ें बहुत...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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लोसर : परंपरा और संस्कृति का पर्वलदाख अंचल को उसकी अनूठी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जाना जाता है। लदाख के बारे में ह्वेनसांग, हेरोडोट्स, नोचुर्स, मेगस्थनीज, प्लीनी और टॉलमी जैसे यात्रियों ने बताया है। इससे लदाख के अतीत का पता चलता है। किसी भी क्षेत्र के अतीत क...
S.M. MAsoom
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विश्व धरोहर सप्ताह का आगमन जौनपुर में कुछ ठंडा सा दिखा जबकि जौनपुर में अनगिनत  सांस्कृतिक , धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को जगह जगह देखा जा सकता है | इस सप्ताह को मनाने का इतिहास कुछ भी हो, लेकिन हमारी कोशिश यह होनी चाहिए  कि हम इन धरोहरों क...
Navin Joshi
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पहली नजर में दो हिंदू-मुस्लिम नामों का सम्मिश्रण लगने वाले महेश खान के नाम में ‘खान’ कोई जाति या धर्म सूचक शब्द नहीं है, लेकिन ‘खान’ शब्द को दूसरे अर्थों में प्रयोग करें तो यह स्थान प्रकृति के लिए भी प्रयोग किए जाने वाले महेश यानी शिव की धरती कहे जाने वाले कुमाऊं म...
 पोस्ट लेवल : Ecology Places Tourism
सतीश सक्सेना
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यूरोप का ट्रिप ढाई महीने का रहा जो कि 25 सितम्बर को पूरा होगा, इस बार जर्मनी से बाहर खूबसूरत प्राग (चेकोस्लोवाकिया या चेकिया) , इंसब्रुक (ऑस्ट्रिया), वेनिस (इटली),  माउंट टिटलिस ( स्विट्ज़रलैंड) पेरिस ( फ्रांस ) और बार्सिलोना ( स्पेन ) घूमने का मौका मिला ! सिर्...
सतीश सक्सेना
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जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह बेहिचक करते हैं ! वे अक्सर अपना मुख्य भोजन दिन में खाना पसंद करते हैं उनके भोजन में  साबुत अनाज की ब्रेड , चीज़ ,योगर्ट , भुने मीट के स्लाइस एवं...