ब्लॉगसेतु

Khushdeep Sehgal
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AMU में 'जिन्ना'...यानी माहौल को चार्ज करने का पूरा मसाला...बस वही सब सुना जाएगा जिसे सुनने के मकसद से अलीगढ़ के बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने AMU के VC को चिट्ठी लिखी कि यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर क्यों लगी है?...अब कोई तथ्य बताने की कोशिश करेगा तो उसे ‘देशद्रोह...
Khushdeep Sehgal
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नवरात्र चल रहे हैं. गुरुवार 28 सितंबर को अष्टमी पर कन्या पूजन होना है. लेकिन बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में शनिवार रात को पुलिस के ‘पुरूष शूरवीरों’ ने एक अलग तरह का ही ‘कन्या पूजन’ किया, छात्राओं पर लाठियां बरसा कर. विडंबना देखिए, एक तरफ हज़ारों किलोमीटर दूर संयुक्...
rambilas garg
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                     हैदराबाद विश्विद्यालय में दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए वाइस चांसलर अप्पा राव, मानव संशाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय म...
rambilas garg
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             हर महीने की तरह आज भी प्रधानमंत्री की मन की बात हुई। देश के सामने पिछले एक महीने में कई जलते हुए सवाल सामने आकर खड़े हो गए हैं। पुरे देश से प्रधानमंत्री से इस पर बोलने और कुछ बातों की स्पष्टता...
Kajal Kumar
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Mithilesh Singh
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क्या आम क्या ख़ास, इस प्याज ने कइयों को उलझा रखा है तो कइयों की नाक में दम कर रखा है. प्याज से जुड़ा मेरा अनुभव भी है, जिसे लिखते वक्त मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि इसे साहित्य की कौन सी विधा में शामिल किया जा सकता है. खैर, यह मेरी व्यक्तिगत समस्या है लेकिन उन...
Shachinder Arya
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धीरे-धीरे अँधेरा बढ़ रहा है। ठंड भी नीचे उतर आई है। सूरज ढले कई पहर बीत गए हो जैसे। या ऐसी कोई चीज़ उस जगह ने कभी देखी ही नहीं है। पता नहीं यह क्या था। बस अँधेरे की तरह दिख रहा है। हमें जल्द ही वहाँ से चल पड़ना होगा। ताकि आगे कोई होटल मिल सके। पर दिक्कत है अभी तक पीछे...
Shachinder Arya
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नींद आ रही है पर लेटुंगा नहीं। क्योंकि पता है लेटने पर भी वह आने वाली नहीं है। इधर वह ऐसे ही परेशान करने लगी है। करवट-करवट बस उबासी आती है नींद नहीं। और फ़िर जब यादें खुली आँखों से आस पास तैर रही हों तो सोने की क्या ज़रूरत। ऐसे ही कल हम मनाली थे। माल रोड घूम रहे थे।...
Shachinder Arya
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जगहें वही रहती हैं उनके किरदार बदल जाते हैं। हमारा कॉलेज उसी जगह था जहाँ बीते तीन महीने से उसे देखते आ रहे थे। कहीं से भी थोड़ा भी अलग नहीं लग रहा था। पर कुछ उस दिन में ही था जो उसे अंदर ही अंदर बदल रहा था। शाम धीरे धीरे वहाँ उतर रही थी। जैसे उस जगह पहले कभी उतरते न...