ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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Aloneना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|मैं अकेला हूँ...ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई हमदर्द नहीं है|मैं अकेला हूँ....कोई कैसे इतना,उलझ जाता है जिंदगी में,की भूल जाता है,कि कोई...
Sanjay  Grover
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नास्तिकता पर बात करते हुए हिंदू-मुस्लिम की बात क्यों आ जाती है? और यह एकतरफ़ा नहीं है, कथित मुस्लिम कट्टरता पर कोई कुछ कहे तो कुछ लोग संघी घोषित करने लगते हैं, कथित हिंदू रीति-रिवाजों पर कहे तो कुछ दूसरे आरोप और आक्षेप लगने लगते हैं। दूसरों के बारे में दूसरे बत...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लदूसरों के वास्ते बेहद बड़ा हो जाऊं मैंइसकी ख़ातिर अपनी नज़रों से भी क्या गिर जाऊं मैंएक इकले आदमी की, कैसी है जद्दो-जहदकौन है सुनने के क़ाबिल, किसको ये दिखलाऊं मैंजब नहीं हो कुछ भी तो मैं भी करुं तमग़े जमाबस दिखूं मसरुफ चाहे यूंही आऊं जाऊं मैंबहर-वहर, नुक्ते-वुक्ते,...
Sanjay  Grover
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PHOTO by Sanjay Groverवे अकेले पड़ गए थे।कोई समाज था जो उन्हें स्वीकार नहीं रहा था।कोई भीड़ थी जो उनके खि़लाफ़ थी।कोई समुदाय था जो उन्हें जीने नहीं दे रहा था।कोई व्यवस्था थी जो उनसे नफ़रत करती थी।कोई बेईमानी थी जिसने उनके खि़लाफ़ साजिश रची थी।मैंने बस थोड़ी-सी मदद कर दी...
Roli Dixit
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GOOGLE IMAGEहाँ, मैं छोड़ आया हूँकिसी को तड़पते हुए अपने पीछेस्नेह की हाँड़ी परसंबंधों की गर्माहटजो मेरे दर्द को सींचती थी,समय-असमय मेरी जरूरतों के वक़्त वो बेहिसाब जीती थी मेरे लिएमैं उसपर खर्च हुए पलों का हिसाब रखने लगा हूँ आजकल,मैं उसकी साँसे कम कर रह...
 पोस्ट लेवल : कविता I'm alone
अपर्णा त्रिपाठी
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ये मेरे जीवन में पहला अवसर नही था जब मैं इस प्रश्न का उत्तर दे रही थी। अब तक तो मुझे इस प्रश्न की आदत सी हो गयी थी, कुछ लोग मेरे कार्य की प्रसंशा करने के बाद य्ह प्रश्न पूंछते थे, कुछ की बातों का आरम्भ ही इस प्रश्न से होता था। आप भी सोच रहे होंगे कि प्रश्न पूंछने क...
 पोस्ट लेवल : why walk Alone?
Sanjay  Grover
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लघुव्यंग्यअपने यहां लोग अकसर अपने बारे में कुछ बातें बहुत अच्छे से जानते हैं। जैसे मैं देखता हूं कि कई लोग दूसरों से तो कहते ही हैं-‘बिज़ी रहो-बिज़ी रहो’, ख़ुद भी अकसर बिज़ी रहने की कोशिश करते पाए/पकड़े जाते हैं। वे कभी ख़ाली हों तो झट से टीवी चला देते हैं, एफ़एम सुनने...
अपर्णा त्रिपाठी
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तन्हा तन्हा सी रहती है तन्हाई मेरीरात भर जागती रहती है तन्हाई मेरीखुद में हंसती है कभी, कभी रो लेती हैख्वाब कुछ बुनती, रहती है तन्हाई मेरीदो कदम उजालों में कभी, कभी सायों मेंशामों सहर सफर में, रहती है तन्हाई मेरीसुर्खी अख्बार की, कभी खामोश गजल कहानी किस्सों मे...
 पोस्ट लेवल : Walk Alone
Mahesh Barmate
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यकीन नहीं होताकि तू अब मुझसे दूर चली गई हैकि जाते - जाते तू मुझसे भीमशहूर हो गई है।तुझे पाने की चाहत थीअपना बनाने की चाहत थीकुछ – कुछ तेरी भी हसरत थीके तुझे भी मुझसे मुहब्बत थी।मुहब्बत थी ऐसेके एक दूजे का होना थाखो कर तेरी बांहों मेंबस तुझमें ही खोना थाहो कर बस तेर...