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sanjiv verma salil
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बुंदेली कहानीकचोंटडॉ. सुमन श्रीवास्तव*सत्तनारान तिबारीजी बराण्डा में बैठे मिसराजी के घर की तरपीं देख रअे ते और उनें कल्ल की खुसयाली सिनेमा की रील घाईं दिखा रईं तीं। मिसराजी के इंजीनियर लड़का रघबंस को ब्याओ आपीसर कालोनी के अवस्थी तैसीलदार की बिटिया के संगें तै हो गओ...
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बुंदेली कहानीस्वयंसिद्धाडॉ. सुमन श्रीवास्तव*पंडत कपिलनरायन मिसरा कोंरजा में संसकिरित बिद्यालय के अध्यापक हते। सूदो सरल गउ सुभाव। सदा सरबदा पान की लाली सें रचौ, हँसत मुस्कात मुँह। एकइ बिटिया, निरमला, देखबे दिखाबे में और बोलचाल में बिलकुल ‘निर्मला’। मिसराजी मोड़ी के म...
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बुंदेली कथा ४बाप भलो नें भैया*एक जागीर खों जागीरदार भौतई परतापी, बहादुर, धर्मात्मा और दयालु हतो।बा धन-दौलत-जायदाद की देख-रेख जा समज कें करता हतो के जे सब जनता के काजे है।रोज सकारे उठ खें नहाबे-धोबे, पूजा-पाठ करबे और खेतें में जा खें काम-काज करबे में लगो रैत तो।बा क...
 पोस्ट लेवल : बुंदेली कथा bundeli kahani
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बुंदेली कहानीसमझदारी*आज-काल की नईं, बात भौर दिनन की है।अपने जा बुंदेलखंड में चन्देलन की तूती बोलत हती।सकल परजा भाई-चारे कें संगै सुख-चैन सें रैत ती।सेर और बुकरियाँ एकई घाट पै पानी पियत ते।राजा की मरजी के बगैर नें तो पत्ता फरकत तो, नें चिरइया पर फड़फड़ाउत ती।सो ऊ राजा...
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बुंदेली कहानीकचोंट डॉ. सुमन श्रीवास्तव *                         सत्तनारान तिबारीजी बराण्डा में बैठे मिसराजी के घर की तरपीं देख रअे ते और उनें कल्ल की खुसयाली सिनेमा की रील घाईं दिखा रईं तीं...
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बुंदेली कहानीस्वयंसिद्धा डॉ.  सुमन श्रीवास्तव *                         पंडत कपिलनरायन मिसरा कोंरजा में संसकिरित बिद्यालय के अध्यापक हते। सूदो सरल गउ सुभाव। सदा सरबदा पान की लाली सें रच...
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बुंदेली कथा ४मतलब के यार*एक जागीर खों जागीरदार भौतई परतापी, बहादुर, धर्मात्मा और दयालु हतो।बा धन-दौलत-जायदाद की देख-रेख जा समज कें करता हतो के जे सब जनता के काजे है।रोज सकारे उठ खें नहाबे-धोबे, पूजा-पाठ करबे और खेतें में जा खें काम-काज करबे में लगो रैत तो।बा की घरव...
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बुंदेली कहानीमस्त रओ मस्ती में*मुतके दिना की बात है।  कहूँ दूर-दराज एक गाँव में एक ठो धुनका हतो। का कई ? धुनका का होत है, नई मालुम?कैंसें मालूम हुउहै? तुम औरें तो बजार सें बनें-बनायें गद्दा, तकिया ले लेत हो।  मनो पुराने समै में जे गद्दा-तकिया कारखानों में...
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बुंदेली कहानीसमझदारी*आज-काल की नईं, बात भौर दिनन की है।अपने जा बुंदेलखंड में चन्देलन की तूती बोलत हती।सकल परजा भाई-चारे कें संगै सुख-चैन सें रैत ती।सेर और बुकरियाँ एकई घाट पै पानी पियत ते।राजा की मरजी के बगैर नें तो पत्ता फरकत तो, नें चिरइया पर फड़फड़ा...
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बुंदेली कहानी छिमा बड़न खों चाहिए*जा कहानी भौत समै पैले की बात आय। एक राज को राजा भौतै नोनों हतो, दयावान गुनी न्यायप्रिय। रैयत सोई ऊखों खूब चाहतती काये कें ऊ सबको भलो करत हतो। सारे राज में सब तरफ अमन-चैन हतो। लोग-लुगाइयां, लड़के-बारे सबई राजी...