कुदरत-ए-हस्तीहक़ गिरेबान की खोज मेंआज चला हूँअपने आप की खोज मेंमंज़िल क्या है मेरीक्या मेरा वज़ूद हैइस धरती में मेरा क्याकाम मौज़ूद हैकहाँ वो बाग़-ए-बहिश्तकहाँ असल दर-ए-रसूल है मंज़िल क्या है मेरीक्या मेरा वज़ूद हैआज चला हूँसब दरकिनार करबंद कर उधेड़ बुनबस अप...