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sanjiv verma salil
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छंद परिचय : १ चौदह वर्णिक अठारह मात्रिक छंद पहचानें इस छंद को, क्या लक्षण?, क्या नाम?रच पायें तो रचें भी, मिले प्रशंसा-नाम..*नमन उषानाथ! मुँह मत मोड़ना.ईश! कर अनाथ, कर मत छोड़ना.साथ हो तुम यदि, यम सँग भी लड़ें.कर-उठा लें नभ, जमा भू म...
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ॐछंद सलिला:निश्चल छंद*छंद-लक्षण: जाति रौद्राक, प्रति चरण मात्रा २३ मात्रा, यति १६-७, चरणांत गुरु लघु (तगण, जगण)लक्षण छंद:कर सोलह सिंगार, केकसी / पाने जीतसात सुरों को साध, सुनाये / मोहक गीतनिश्चल ऋषि तप छोड़, ऱूप पर / रीझे आपसंत आसुरी मिलन, पुण्य कम / ज्यादा पापउदाहर...
 पोस्ट लेवल : nishchal chhand निश्चल छंद
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ॐछंद सलिला:रसाल / सुमित्र छंद*छंद-लक्षण: जाति अवतारी, प्रति चरण मात्रा २४ मात्रा, यति दस-चौदह, पदारंभ-पदांत लघु-गुरु-लघु.लक्षण छंद:रसाल चौदह--दस/ यति, रख जगण पद आद्यंतबने सुमि/त्र ही स/दा, 'सलिल' बने कवि सुसंतउदाहरण:१. सुदेश बने देश / ख़ुशी आम को हो अशेषसभी समा...
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ॐछंद सलिला:सुखदा छंद*छंद-लक्षण: जाति महारौद्र, प्रति चरण मात्रा २२ मात्रा, यति १२-१०, चरणांत गुरु (यगण, मगण, रगण, सगण)लक्षण छंद:सुखदा बारह-दस यति, मन की बात कहेगुरु से करें पद-अंत, मंज़िल निकट रहेउदाहरण:१. नेता भ्रष्ट हुए जो / उनको धुनना हैजनसेवक जो सच्चे / उनको सुन...
 पोस्ट लेवल : sukhda chhand सुखदा छंद
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ॐछंद सलिला:मदनाग छंद*छंद-लक्षण: जाति अवतारी, प्रति पद - मात्रा २५ मात्रा, यति १७ - ८लक्षण छंद:कलाएँ सत्रह-आठ दिखाये, नटवर अपनीउगल विष नाग कालिया कोसे, किस्मत अपनीछंद मदनाग निराशाएं कर दूर, मगन होमुदित मन मथुरावासी हर्षित, मोद मगन होंउदाहरण:१. देश की जयकार करते रहें...
 पोस्ट लेवल : madnag chhand मदनाग छंद
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रसानंद है छंद नर्मदा : २ २.छंद : उद्भव, अंग तथा प्रकार- आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’छंद का उद्भव आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से मान्य है। कथा है कि मैथुनरत क्रौंच पक्षी युग्म के एक पक्षी को बहेलिये द्वारा तीर मार दिये जाने पर उसके साथी के आर्तनाद को सुनकर महर्षि के मुख से...
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भुजंगप्रयात छन्द  चार यगण आवृत्ति ही है छंद भुजंगप्रयात*'चतुर्भिमकारे भुजंगप्रयाति' अर्थात भुजंगप्रयात छंद की हर पंक्ति यगण की चार आवृत्तियों से बनती है।यमाता X ४ या ४ (लघु गुरु गुरु) अथवा निहारा निहारा निहारा निहारा के समभारीय पंक्तियों से भुजंगप्रयात छं...
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मुक्तक मापनी २२११ २२२२ २११२ २२ = २४चौबीस मात्रिक अवतारी जातीय दिगपाल छन्द*जीना न इसे आया, मरना न उसे भायाहर बशर यहाँ नाखुश, संसार अजब मायाहर रोज सजाता है, सोचे कि आप सजताआखिर न बचा पाता, नित मिट रही सुकाया*सँग कौन कभी आता? सँग कौन कभी जाता?अपना जिसे बताता, तम...
 पोस्ट लेवल : दिगपाल छन्द digpal chhand
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ॐछंद सलिला:मोहन छंदसंजीव*छंद-लक्षण: जाति रौद्राक, प्रति चरण मात्रा २३ मात्रा, यति ५-६-६-६, चरणांत गुरु लघु लघु गुरुलक्षण छंद:गोपियाँ / मोहन के / संग रास / खेल रहींराधिका / कान्हा के / रंग रंगी / मेल रहींपाँच पग / छह छह छह / सखी रखे / साथ-साथकहीं गुरु / लघु, लघु गुु...
 पोस्ट लेवल : mohan chhand मोहन छंद
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ॐछंद सलिला: अवतार छंदसंजीव*छंद-लक्षण: जाति रौद्राक, प्रति चरण मात्रा २३ मात्रा, यति १३ - १०, चरणान्त गुरु लघु गुरु (रगण) ।लक्षण छंद:दुष्ट धरा पर जब बढ़ें / तभी अवतार होतेरह दस यति, रगण रख़ / अंत रसधार होसत-शिव-सुंदर ज़िंदगी / प्यार ही प्यार होसत-चित-आनँद हो जहाँ...
 पोस्ट लेवल : avtar chhand अवतार छंद