ब्लॉगसेतु

डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
569
बळिहारी उण देस री, माथा मोल बिकाय ।धव धावाँ  छकिया  धणाँ, हेली आवै दीठ ।मारगियो  कँकू  वरण,  लीलौ  रंग  मजीठ ।।नहँ  पड़ोस  कायर  नराँ,  हेली वास सुहाय ।बलिहारी उण देस री,  माथा मोल बिकाय ।।घोड़ै चढ़णौ&nbsp...
Khushdeep Sehgal
57
क्रिकेटर से नेता बने इमरान ख़ान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने जुम्मा जुम्मा दो हफ्ते ही हुए हैं...लेकिन वहां कुछ घटनाएं ऐसी हुई हैं जिन्हें लेकर नई नवेली सरकार आलोचनाओं के घेरे में हैं...मीडिया में भी इन घटनाओं को जमकर तूल दिया जा रहा है...वहां के टीवी चैनलों पर...
Bharat Tiwari
25
उन्हें विश्वास है कि दिल्ली में रहता हूँ इसलिए कवि हूँकविता का कुलीनतंत्र (5) — उमाशंकर सिंह परमार जब तक कवि अपनी जमीन में नहीं खड़ा होता तब तक वह अपनी परम्परा में नहीं जुड़ता न परम्परा का विकास करते हुए समकालीन होने की अर्हता हासिल करता हैसमकालीन कविता के कुली...
Bharat Tiwari
25
बहुत से कवि ऐसे भी हैं जो न तो महानगरीय कुलीनता से मुक्त हुए न ही अपने जातीय सवर्णवादी संस्कारों से मुक्त हुए मगर अपने आपको "वाम" कहने का दुराग्रह भी रखते हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).p...
Bharat Tiwari
25
भाग-3: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमारयह समय विज्ञापन और प्रचार और समझौतों की राजनीति का हैजमीन में रहने वाले पद विहीन, पोजीशन विहीन, गाँव और कस्बे के एक्टिविस्ट लेखन को हासिए पर धकेलने के लिए "दिल्ली...
Bharat Tiwari
25
साम्प्रदायिकता विरोध की एक अवधारणा है कि "हिन्दुत्व की बुराई करना" जो हिन्दुत्व की बुराई करेगा वही धर्मनिरपेक्ष है। यह उथली समझ है और दूसरे किस्म की साम्प्रदायिकता है। भाग-२: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र&nbsp...
Bharat Tiwari
25
सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमारमहानगरीय अभिजात्य कवियों को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी चकमें में उलझकर अचानक कविता में हाथ आजमाने के लिए उतर आए हों...(adsbygoogle = window.adsbygoogle || [])...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
569
मड़फा दुर्ग : जहाँ कथाएँ आज भी जिंदा हैंबुंदेलखंड का विंध्य अंचल अपने अतीत से ही अनेक पुरा-कथाओं और मिथकों का केंद्र रहा है। यहाँ कण-कण में ऐसी रोमांचकारी कथाएँ बसी हैं, जो आज भी लोगों को आश्चर्य में भी डाल देती हैं और अपने आकर्षण में जकड़ भी लेती हैं। बाँदा जनपद क...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
569
19वें कुशोग बकुल रिनपोछे का जीवन और योगदानबकुल लोबस़ङ थुबतन छोगनोर, जिन्हें लदाख अंचल सहित देश-विदेश में कुशोग बकुल रिनपोछे के रूप में जाना जाता है। ऊँची-ऊँची हिमाच्छादित पर्वत श्रेणियों की तरह निर्मल, पवित्र और महान व्यक्तित्व वाले पूज्यपाद कुशोग बकुल रिनपोछे लदाख...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
569
लदाख का धार्मिक नृत्य- छमहिमालय के उच्चतम शिखरों में फैली बौद्ध धर्म की महायान परंपरा अपनी अनूठी धार्मिक विशिष्टताओं और इन विशेषताओं के साथ मिलकर विकसित हुई अनूठी संस्कृति के कारण युगों-युगों से धर्मभीरुओं को, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। हिमालय...