ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
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lassanwalaकला माध्यमों में रंगमंच अपने समय में सबसे सशक्त हस्तक्षेप करता है क्योंकि यह वर्तमान की कला है और   इस पर प्रासंगिक होने का दबाव भी बहुत है लेकिन प्रस्तुति दर प्रस्तुति हम देखते हैं कि रंगमंच बिना किसी सुनयोजित दृष्टि के हो रहा है,  करने वा...
 पोस्ट लेवल : delhi theatre Theatre in 2017
अमितेश कुमार
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व्यावसायिक रंगमंचकेअधिकाँशदर्शकजोउपभोक्ताहोतेहैंयानीखरीदनेकीक्षमतारखताहैंवैसीप्रस्तुतियांदेखनापसंदकरतेहैंजिसमेंमनोरंजनहोऔरनैतिकमान्यताओंकेविपरीतकुछनहो. लोकप्रियतापानेकायहएकसहजनुस्खाभीहै. लेकिनकलाकाकामलेकिनकलाकाकामदर्शकोंकीशर्तोपरउनकामनोरंजनभरनहींहैदर्शकोंकोप्रशिक्ष...
अमितेश कुमार
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दिल्ली रंगमंच के जाने माने रंगकर्मी अरूण कुकरेजा का हाल ही में देहांत हो गया. उन्होंने फ़ैज़ल अलकाज़ी के साथ रूचिका थिएटर की स्थापना की थी औऱ बहुत से नाटकों का निर्देशन किया. उनको याद किया है उनके साथी फ़ैज़ल अलकाज़ी ने.माडर्न स्कूल का हमारा बैच जो 1972 में पास हुआ...
अमितेश कुमार
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द सीगलदिल्ली में अंग्रेजी रंगमंच पर लिखने के प्रस्ताव को मैंने स्वीकार तो कर लिया लेकिन शुरू करते ही मुझे पता चल गया कि यह किस बीहड़ में मैं प्रवेश कर गया हूं.  अतः यह मर्सिया यही पढ़ देना चाहिये कि हम सहेजने के आदि नहीं हैं चीजें जब अपने वर्तमान में रहती हैं तब...
 पोस्ट लेवल : delhi theatre Ebrahim Alkazi Indian English theatre
अमितेश कुमार
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रंगमंच में सामयिकता का बड़ा ही महत्व है. रंगमंच चूंकि वर्तमान में घटित होता है अतः उस पर दबाव होता है कि वह वर्तमान से संवाद करे, भले ही वह पौराणिक आलेख प्रस्तुत करे लेकिन उसकी व्याख्या उसका अंतर्पाठ वर्तमान से जुड़ा हो अन्यथा रंगमंच केवल एक सजीव चित्रावली बन कर रह ज...
अमितेश कुमार
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विस्थापन शब्द  से ही उजड़ने का बोध होता है लेकिन ऐसा विस्थापन जो पूरी तरह नहीं हो कर इस तरह से हो कि शरीर विस्थापित होकर कहीं और है और मन कही और है? उस विस्थापन कि पीड़ा अधिक विदारक होती है. उन बहुत से लोगो के लिये जो अपने घर बार छोड़कर रोजी रोटी की तलाश में बाहर...
अमितेश कुमार
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टिकट खिड़की पर अग्रिम बुकिंग के साथ ही भारंगम की हलचल शुरू हो गई है. तैयारी का अंदाजा आपको   भगवानदास रोड पर मुड़ने के साथ हॊ हो जायेगा.  रानावि की बाहरी दिवारों पर प्रस्तुतियों  के चित्रों से सजे बड़े बड़े फ्लैक्स आपका स्वागत करते नजर आयेंगे. ...
अमितेश कुमार
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कल से दिल्ली के रंगमंच पर कहानी के रंगमंच की वापसी हुई है. कल अंकुर जी के निर्देशन में चार कहानियों का मंचन हुआ. जिसमें ‘पाजेब’ सबसे जबरदस्त, ‘परदा’ और ‘चीफ़ की दावत’सामान्य और ‘उसने कहा था’ कमजोर रही. प्रस्तुति की कमजोरी का कारण अभिनेता और मजबूती का कारण भी अभिनेत...
अमितेश कुमार
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“निर्देशक का यह मूलभूत कर्तव्य है कि वह नाटक के अर्थ को सशक्त दृश्यबिंबों के ऐसे क्रम में जमा दे कि दर्शको को अनजाने में ही उसका ग्रहण सुलभ हो जाय।" इब्राहिम अलकाज़ी ने यह ‘तुगलक़’ के निर्देशकीय में कहा था. तुगलक देखे के लौटा तब से यह लाईन घूम रही थी दिमाग में...
अमितेश कुमार
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दिल्ली रंगमंच के लिये मौसम खुशगवार हो गया है. अक्टुबर की शुरुआत हुई उर्दु अकादमी के ड्रामा फ़ेस्टिवल से जिसमें सप्ताह भर विभिन्न नाट्यदलों ने नाटक का मंचन किया. अधिकांश नाटक मंटो के जीवन और रचना पर आधारित थे. मंटो की यह जन्मशताब्दी है इसलिये विभिन्न नाट्यदलों ने इस...