ब्लॉगसेतु

आचार्य  प्रताप
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ये समस्त दोहे आज से ठीक एक वर्ष पूर्व लिखे गए थे | दोहे-------खड़े पंक्ति में हो गए , हाला की थी बात।राशन की होती अगर , बतलाते औकात।।०१।।--------पंक्ति बनाकर मौन सब , खड़े हुए चुपचाप।मधुशाला के सामने , देखो तुम्हीं प्रताप।।०२।।-------बड़े दिनों से बंद थे , मध...
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Hari Mohan Gupta
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समस्या पूर्ति दोहा     द० हरिमोहन गुप्त               “सामाजिक”भाई ,भाई से लड़ें, अलग अलग  हों द्वार,अपना घर बंट जाय तो ,कब रहता है प्यार l   कल तक सबमें प्रेम ...
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Hari Mohan Gupta
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बेलेन्टाइन डेबेलेन्टाइन डे  मना, हो  गई  उनसे  भूल,एक अपरचित को दिया, बस गुलाब का फूल |            उनसे बोली वह प्रिये, बैठो मेरे पास,         &n...
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Hari Mohan Gupta
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                        यह विशेषता राम की, उनको प्यारे भक्त,                        जितना...
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Hari Mohan Gupta
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                 सारा जग  है  राममय, सभी जगह हैं राम,                मन निर्मल यदि आपका, तो बसते अभिराम l चलते फिरते भी भजो, मन ही मन श...
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Hari Mohan Gupta
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 (सामयिक दोहे,) आज चाँद पर जा रहा, भारत निर्मित यान,  (सावन के पहिले सोमवार को )अब तलाक अपराध है, महिलाओं की शान |  (सावन के दूसरे सोमवार को )धारा  सत्तर तीन सौ, लुप्त  हुई  पहिचान,   (सावन के तीसरे सोमवार को )सभी कार्य होते...
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sanjiv verma salil
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राष्ट्रनेत्री सुषमा स्वराज के प्रति भावांजलि* शारद सुता विदा हुई, माँ शारद के लोक धरती माँ व्याकुल हुई, चाह न सकती रोक * सुषमा से सुषमा मिली, कमल खिला अनमोल मानवता का पढ़ सकीं, थीं तुम ही भूगोल * हर पीड़ित की मदद कर, रचा नया इतिहास सुषमा नारी शक्ति का, करा सकीं आभ...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा: ''पाखी खोले पंख'' : गुंजित दोहा शंख [कृति विवरण: पाखी खोले शंख, दोहा संकलन, श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, प्रथम संस्करण, २०१७, आकार २२ से.मी. x १४ से.मी., पृष्ठ १०४, मूल्य ३००/-, आवरण सजिल्द बहुरंगी जैकेट सहित, प्रगतिशील प्रकाशन दिल्ली, दोहाकार संपर...
sanjiv verma salil
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समीक्षा ;सुधियों की देहरी पर - दोहों की अँजुरी समीक्षाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण: सुधियों की देहरी पर, दोहा संग्रह, तारकेश्वरी तरु 'सुधि', प्रथम संस्करण २०१९, आई.एस.बी.एन. ९७८९३८८४७१४८०, आकार २१.५ से.मी. x १४ से.मी., आवरण सजिल्द बहुरंगी, जै...
sanjiv verma salil
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दोहा दुनिया*जब तक मन उन्मन न हो, तब तक तन्मय हो नशांति वरण करना अगर, कुछ अशान्ति भी बो न*तब तक कुछ मिलता कहाँ, जब तक तुम कुछ खो न.दूध पिलाती माँ नहीं, बच्चा जब तक रो न.*खोज-खोजकर थक गया, किंतु मिला इस सा न.और सभी कुछ मिला गया, मगर मिला उस सा न.*बहुत हुआ अब मानिए, र...
 पोस्ट लेवल : doha दोहा लीक से हटकर