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Hari Mohan Gupta
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                 सारा जग  है  राममय, सभी जगह हैं राम,                मन निर्मल यदि आपका, तो बसते अभिराम l चलते फिरते भी भजो, मन ही मन श...
 पोस्ट लेवल : Doha
Hari Mohan Gupta
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 (सामयिक दोहे,) आज चाँद पर जा रहा, भारत निर्मित यान,  (सावन के पहिले सोमवार को )अब तलाक अपराध है, महिलाओं की शान |  (सावन के दूसरे सोमवार को )धारा  सत्तर तीन सौ, लुप्त  हुई  पहिचान,   (सावन के तीसरे सोमवार को )सभी कार्य होते...
 पोस्ट लेवल : Doha
sanjiv verma salil
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राष्ट्रनेत्री सुषमा स्वराज के प्रति भावांजलि* शारद सुता विदा हुई, माँ शारद के लोक धरती माँ व्याकुल हुई, चाह न सकती रोक * सुषमा से सुषमा मिली, कमल खिला अनमोल मानवता का पढ़ सकीं, थीं तुम ही भूगोल * हर पीड़ित की मदद कर, रचा नया इतिहास सुषमा नारी शक्ति का, करा सकीं आभ...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा: ''पाखी खोले पंख'' : गुंजित दोहा शंख [कृति विवरण: पाखी खोले शंख, दोहा संकलन, श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, प्रथम संस्करण, २०१७, आकार २२ से.मी. x १४ से.मी., पृष्ठ १०४, मूल्य ३००/-, आवरण सजिल्द बहुरंगी जैकेट सहित, प्रगतिशील प्रकाशन दिल्ली, दोहाकार संपर...
sanjiv verma salil
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समीक्षा ;सुधियों की देहरी पर - दोहों की अँजुरी समीक्षाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण: सुधियों की देहरी पर, दोहा संग्रह, तारकेश्वरी तरु 'सुधि', प्रथम संस्करण २०१९, आई.एस.बी.एन. ९७८९३८८४७१४८०, आकार २१.५ से.मी. x १४ से.मी., आवरण सजिल्द बहुरंगी, जै...
sanjiv verma salil
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दोहा दुनिया*जब तक मन उन्मन न हो, तब तक तन्मय हो नशांति वरण करना अगर, कुछ अशान्ति भी बो न*तब तक कुछ मिलता कहाँ, जब तक तुम कुछ खो न.दूध पिलाती माँ नहीं, बच्चा जब तक रो न.*खोज-खोजकर थक गया, किंतु मिला इस सा न.और सभी कुछ मिला गया, मगर मिला उस सा न.*बहुत हुआ अब मानिए, र...
 पोस्ट लेवल : doha दोहा लीक से हटकर
sanjiv verma salil
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दोहा दुनिया :शुभ प्रभात*रह प्रशांत रच छंद तो, शुभ प्रभात हो आपगौरैया कलरव करे, नाद सके जग व्याप *खुली हवा में सांस ले, जी भर फिर दे छोड़ शुभ प्रभात कह गगन से, सुत सम नाता जोड़*पैर जमा जब धरा पर, कर करबद्ध प्रणाम माता तेरी गोद में, आ...
 पोस्ट लेवल : doha shubh prabhat शुभ प्रभात दोहा
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला *सद्गुरु ओशो ज्ञान दें, बुद्धि प्रदीपा ज्योतरवि-शंकर खद्योत को, कर दें हँस प्रद्योत *गुरु-छाया से हो सके, ताप तिमिर का दूर. शंका मिट विश्वास हो, दिव्य-चक्षु युत सूर.*गुरु गुरुता पर्याय हो, खूब रहे सारल्यदृढ़ता में गिरिवत रहे, सलिला सा तारल्...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिलाःसंजीव*प्राची पर आभा दिखी, हुआ तिमिर का अन्तअन्तर्मन जागृत करें, सन्त बन सकें सन्त*आशा पर आकाश टंगा है, कहते हैं सब लोगआशा जीवन श्वास है, ईश्वर हो न वियोग*जो न उषा को चाह्ता, उसके फूटे भागकौन सुबह आकर कहे, उससे जल्दी जाग*लाल-गुलाबी जब दिखें, मनुआ प्राची-ग...
 पोस्ट लेवल : doha दोहा
sanjiv verma salil
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दोहा सलिलाआभा जब आ भा कहे, तितली रंग बिखेरकहे कली से खिल सखी, अब न अधिक कर देर*कमलमुखी ने हुलसकर, जब देखा निज रूपलहरें संजीवित हुई,  सलिल हो गया भूप *अंजुरी में ले सलिल को, लिया अधर ने चूमहम भी कह मचले नयन, लगे मचाने धूम*चरण चम्पई सलिल छू, सिहरे...
 पोस्ट लेवल : doha दोहा