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जौनपुर के इतिहास के बारे में कुछ बहुत बड़ी बड़ी गलतफहमियां है जिसमे से एक यह भी है |जौनपुर आज़मगढ़ हाइवे पर सिपाह चौराहे से जब आप गुज़रते हैं तो आपकी नज़रें एक आलिशान मक़बरे की तरफ ज़रूर जाएंगी | इस मक़बरे के इतिहास को हकीकत में बहुत कम लोग जानते है और अक्सर इसे लोग दिल्ली...
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विश्व के हर शहर हर देश का अपना एक इतिहास होता है जिसमे सत्ता हासिल करने के लिए आपसी युद्ध और समझोतों की बहुत बड़ी भूमिका हुआ करती है | बहुत बार सभ्यताएं बदल जाती हैं आबाद शहर खंडहरों में और खंडहर आबादी में बदल जाय करते हैं | शासक कोई भी हो उसका भी अपना एक धर्म...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इमाम हुसैन ने आशूर के दिन शहादत के कुछ पहले खुत्बा दिया जिसमे उन्होंने कोशिश की कि यह लश्कर ऐ यज़ीद राह ऐ हक़ पे आ जाय लेकिन जब इमाम खुत्बा देते लश्कर ढोल बजने लगते जिस से ना वे सुनें खुत्बा और न लश्कर के सिपाही सु...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वो खुशनसीब होता है जिसके घर वाले पति पत्नी भाई बहन उसके सुख दुःख के साथी होते हैं लेकिन कुछ बदनसीब होते हैं जिन्हे अपने ही घर में परिवार में अपनापन नहीं मिलता और वे मजबूर हो जाते हैं गैरों के साथ मिलजुल के खुश रह...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); क्या अली (अ ) के विचारों, अक़वाल और वसीयतों को सिर्फ इमामबाड़ों और मिम्बरों तक महदूद करके हम अली वाले और मोमिन कहलायेंगे ?एस एम् मासूम आज हज़रत अली (अ ) की शहादत के १४०० साल हो गए और इन १४०० सालो से हज़रत अली के...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); मान्यता है कि कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब जब पहाड़ों पर चलते थे तो उनके पैरों के निशान शिला पर अंकित हो जाते थे। आज भारत में ऐसे अनगिनत क़दम ऐ रसूल के निशानात आपको मिलेंगे जिनमे से अधिकतर बादशाओं और उनसे जुड़े लोगो...
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दुनिया हमारे व्यवहार से किरदार से , हमारे  धर्म की किताब और हमारे धर्म के महापुरुषों को पहचानती है और हम धर्म की किताब से और अपने धर्म के महापुरुषों की तारीफ से खुद को पहचनवाने की मूर्खता करते हैं  और अपने धर्म...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इतिहास की किताबों में वर्णित है कि एक बार ईश्वर के महान फ़रिश्ते हज़रत जिब्रईल हज़रत सुलैमान पैग़म्बर के पास आए तो अमृत का एक प्याला लाए और कहने लगेः महान ईश्वर ने आपको यह अधिकार दिया है कि अगर आप इस प्याल को पी...
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जौनपुर में फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ के आबाद करने के साथ साथ यहां मस्जिदों का निर्माण शुरू हो चूका था लेकिन यह मस्जिदें बहुत बड़ी नहीं हुआ करती थीं | जफराबाद और जौनपुर में तुग़लक़ के दौर मस्जिदें बहुत सी मिलती हैं | जैसे ज़फराबाद  की चौरासी खम्बों वाली जामा मस्जिद ज़फर...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली इब्ने अभी तालिब को मस्जिद ऐ कूफ़ा में सुबह की नमाज़ में एक ज़ालिम इब्ने मुल्जिम से उस वॉर शईद किया जब अली सजदे में थे | यह १९ रमज़ान १४४० AH (26 jan 661 CE ) की सुबह थे जब रसूल ऐ खुदा हज़रत...
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