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sanjiv verma salil
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मनहरण घनाक्षरी छन्दविधान: ८-८-८-७ वर्ण .चीनियों को ठोंककर, पाकियों को पीटकर, फ़हरा तिरंगा आज, हम मुसकायेगे.जन गण मन, वंदे मातरम गायेंगे.सिक्किम भूटान नेपाल की न बात करो,तिब्बत को भी फिर से, आजाद हम करायेंगे.भारत से भाग किसी वक्त जो अलग हुए,एक साथ जोड...
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कार्यशाला: रचना-प्रति रचना घनाक्षरी फेसबुक*गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश*चमक-दमक साज-सज्जा मुख-मंडल पैतड़क-भड़क भी विशेष होना चाहिए।आत्म प्रचार की क्रिकेट का हो बल्लेबाजलिस्ट कार्यक्रमों वाली पेश होना चाहिए।।मछली फँसानेवाले काँटे जैसी शब्दावलीहीरो जै...
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कल और आज: घनाक्षरीकल :कज्जल के कूट पर दीप शिखा सोती है कि,श्याम घन मंडल मे दामिनी की धारा है ।भामिनी के अंक में कलाधर की कोर है कि,राहु के कबंध पै कराल केतु तारा है ।शंकर कसौटी पर कंचन की लीक है कि,तेज ने तिमिर के हिये मे तीर मारा है ।काली पाटियों के बीच मोहनी की म...
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कवित्त घनाक्षरी विविध भाषाओँ मेंलाख़ मतभेद रहें, पर मनभेद न हों, भाई को हमेशा गले, हँस के लगाइए|लात मार दूर करें, दशमुख सा अनुज, शत्रुओं को न्योत घर, कभी भी न लाइए|भाई नहीं दुश्मन जो, इंच भर भूमि न दें, नारि-अपमान कर, नाश न बुलाइए|छल-छद्म, दाँव-पेंच, दन्द-फंद अपना...
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घनाक्षरी सलिला:१घनाक्षरी: एक परिचय संजीव *हिंदी के मुक्तक छंदों में घनाक्षरी सर्वाधिक लोकप्रिय, सरस और प्रभावी छंदों में से एक है. घनाक्षरी की पंक्तियों में वर्ण-संख्या निश्चित (३१, ३२, या ३३) होती है किन्तु मात्रा गणना नहीं की जाती. अतः, घनाक्षरी की पंक्...
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घनाक्षरी सलिला:१घनाक्षरी:एक परिचय संजीव *हिंदी के मुक्तक छंदों में घनाक्षरी सर्वाधिक लोकप्रिय, सरस और प्रभावी छंदों में से एक है. घनाक्षरी की पंक्तियों में वर्ण-संख्या निश्चित (३१, ३२, या ३३) होती है किन्तु मात्रा गणना नहीं की जाती. अतः, घनाक्षरी की पंक्त...
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एक दोहा संजीव *मैं-तुम बिसरायें कहें, हम सम हैं बस एक. एक प्रशासक है वही, जिसमें परम विवेक..*एक घनाक्षरी पारस मिश्र, शहडोल.. *फूली-फूली राई, फिर तीसी गदराई. बऊराई अमराई रंग फागुन का ले लिया. मंद-पाटली समीर, संग-संग राँझा-हीर, ऊँघती चमेली संग फूँकता डहेलिया.. थरथरा...
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घनाक्षरी सलिला  आठ-आठ-आठ-सात, पर यति रखकर, मनहर घनाक्षरी, छंद कवि रचिए। लघु-गुरु रखकर, चरण के आखिर में,'सलिल'-प्रवाह-गति, वेग भी परखिए।। अश्व-पदचाप सम, मेघ-जलधार सम, गति अवरोध न हो, यह भी निरखिए। करतल ध्वनि कर, प्रमुदित श्रोतागण- 'एक बार और' कहें, सुनिए-ह...
 पोस्ट लेवल : ghanakshari manharan मनहर घनाक्षरी
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घनाक्षरी*चलो कुछ काम करो, न केवल नाम धरो,        उठो जग लक्ष्य वरो, नहीं बिन मौत मरो।रखो पग रुको नहीं, बढ़ो हँस चुको नहीं,        बिना लड़ झुको नहीं, तजो मत पीर हरो।।गिरो उठ आप बढ़ो, स्वप्न नव नित्य गढ़ो,     ...
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एक रचना*राम कहे राम-राम, सिया कैसे कहें राम?,                          होंठ रहे मौन थाम, नैना बात कर रहे।मौन बोलता है आज, न अधूरा रहे काज,                 ...